संवाद न्यूज एजेंसी
घरौंडा। नवरात्र के पहले व्रत के दौरान कुट्टू का आटा खाने से शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में 50 से ज्यादा महिला, पुरुष व बच्चे बीमार हो गए। परिजनों ने उन्हें आनन-फानन प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों में भर्ती करवाया। इस दौरान अफरा तफरी का माहौल बन गया। कुछ मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि अधिकतर को अस्पताल में भर्ती कर लिया।
दो की हालत गंभीर देखते हुए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। नायब तहसीलदार इंदर सिंह ने अस्पताल का दौरा कर मरीजों का हालचाल जाना। श्रद्धालुओं ने दुर्गा मां की उपासना कर शनिवार शाम कुट्टू व शामक के आटे से बने पकवान खाए। जिसके बाद उनकी तबीयत खराब होनी शुरू हो गई। किसी को कंपकंपी महसूस होने लगी तो किसी को उल्टी और दस्त शुरू हो गए। शनिवार की आधी रात को ही सरकारी अस्पताल में मरीज आने शुरू हो गए। जिसके बाद डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया। रविवार सुबह तक अस्पताल के सभी बेड मरीजों से भरे थे। एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों को लेटाया गया था। मरीजों का कहना है कि जो आटा दुकानों पर बिक रहा है, वह पुराना है। इसीकारण लोगों की तबीयत खराब हुई है। ऐसे मुनाफाखोरों के खिलाफ प्रशासन एक्शन नहीं लेता।
इन मरीजों की बिगड़ी तबीयत
सरकारी अस्पताल में वार्ड छह के कुलबीर राणा, निशांत, लता, प्राची, भोली प्रशांत, प्रिया, सरोज शिमला, विनोद कुमार, कमल, ज्योति, कमल, चेतन, वेदपाल, ममता, मुस्कान सुभाष, गूंजन, संतोष, रीटा, बाला देवी, विशाल, अजय, रवि, सरोज अस्पताल में भर्ती हैं। इससे अलग प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीजों ने इलाज कराया।
शनिवार रात फूड प्वॉयजनिंग के करीब 26 केस आए थे। जिनसे पूछने पर पता चला कि उन्होंने कुट्टू के आटे से बने पकवान खाए थे। उसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। पता चला है कि 25 के करीब मरीज प्राइवेट अस्पताल में भी दाखिल हुए थे। किसी मरीज को चक्कर आ रहे थे तो किसी को उल्टी व दस्त लग रहे थे। काफी मरीजों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी है।
डॉ. अजय, सरकारी अस्पताल, घरौंडा
कुट्टू का आटा खाने से लोगों की तबीयत बिगड़ी है, इसकी सूचना मिलने पर घरौंडा क्षेत्र में सैंपल लिए जा रहे हैं। जिनके सैंपल फेल आएंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी। लोगों से अपील है कि वह कुट्टूू के आटे का सेवन करने से बचें। व्रत में फल का ही सेवन करें, क्योंकि कुट्टू के आटे की तासीर गर्म होती है। जिसका ज्यादा सेवन करने पर तबीयत बिगड़ जाती है।
डा. संदीप कादियान, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, करनाल