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तीन साल की उम्र में गंवाया एक हाथ पर हिम्मत और मेहनत से पाया मुकाम

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हम्मत और कड़ी मेहनत के आगे कुछ भी नामुमकिन नहीं है। यह कहना है गांव खेड़ी नरू की बहू रीना रानी का, जिन्होंने डिस्कश, ज्वेलिन थ्रो, शॉटपुट में न सिर्फ घर परिवार और गांव का, बल्कि जिले और प्रदेश का भी नाम रोशन किया है।
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रीना रानी ने बताया कि जब वह तीन साल की थी तो चारा काटने वाली मशीन में उनका बांया हाथ कट गया। बड़ी हुई तो जल्द ही माता पिता ने विवाह के बंधन में बांध दिया, लेकिन पढ़ाई और खेल के जुनून ने उन्हें घर से निकलने पर मजबूर किया। टीवी पर जब भी किसी खिलाड़ी को मेडल लेकर आता देखती तो मन कचोटता कि देश के लिये वह भी एक दिन मेडल लेकर आएगी। 35 वर्षीय रीना ने गांव की बंदिशों को तोड़ा और अपने अरमानों को पंख देने के लिये निकल पड़ी गांव से शहर की ओर। पति रणबीर सिंह का साथ मिला तो रीना रानी ने भी उड़ान भरी। चार सालों में ही डिस्कश और ज्वेलिन थ्रो में नेशनल स्तर पर 10 मेडल जीते। इनमें 4 गोल्ड, 3 सिल्वर और 3 ब्रांज मेडल शामिल हैं।
जब परिजन बोले- चूल्हा चौका करो, खेल वेल को जाने दो
पुराने खयालात होने के कारण खेल के प्रति जनून को जगजाहिर करने के लिये रीना रानी को नौ साल लग गए। पहली बार स्टेडियम का रुख किया तो परिजन बोले- खेल वेल जाने दो चूल्हा चौका करो, लेकिन रीना ने खेलों में दम दिखाने का मन बना लिया था।
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नौकरी और खेल दोनों साथ
रीना को 2006 में आंगनबाड़ी में नौकरी मिली। सुबह से शाम तक नौकरी और फिर कर्ण स्टेडियम में प्रैक्टिस। रीना सुबह घर और शाम को कर्ण स्टेडियम में चार से पांच घंटे तक डिस्कश, ज्वेलिन और शॉटपुट का कड़ा अभ्यास करती है। उन्होंने बताया कि यह सभी गेम फील्ड इवेंट हैं।
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