करनाल। कुर्की की कार्रवाई के दबाव में डिफॉल्टर चावल मिल संचालकों ने सरकारी खजाने में करोड़ों रुपये जमा कराने शुरू कर दिए हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने करीब 12.5 करोड़ रुपये की रिकवरी की है। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2012-13 से करीब 300 करोड़ रुपये की रिकवरी लंबित थी और करीब 58 राइस मिलें डिफॉल्टर थीं।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग नियंत्रक मुकेश कुमार ने बताया कि जीआर इंटरनेशनल से करीब 3.8 करोड़ रुपये, भुवनेश्वर राइस मिल से 2 करोड़, गुरुनानक राइस मिल से 1.5 करोड़, अग्रवाल राइस मिल से 2.5 करोड़ और रोहित ट्रेडिंग से करीब 50 लाख रुपये की रिकवरी की गई है। इन पांच मामलों से ही करीब 10.3 करोड़ रुपये सरकारी खाते में आए हैं। विश्वकर्मा राइस मिल से दो करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हरिओम राइस मिल से बकाया राशि की वसूली भी प्रक्रिया में है। विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में अन्य डिफॉल्टर मिलों से भी रिकवरी की उम्मीद है।
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के अनुसार, वर्ष 2012-13 से करीब 300 करोड़ रुपये की राशि लंबित थी। करीब 58 मिलों को डिफॉल्टर चिह्नित किया गया था। उपायुक्त आनंद कुमार शर्मा ने बताया कि डिफॉल्टर राइस मिलों से सरकारी राशि की वसूली के लिए डीएफएससी और डीआरओ कार्यालय के बीच समन्वय कर कार्रवाई को गति दी जा रही है।
ओटीएस नीति से भी रिकवरी को मिलेगी रफ्तार
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने बताया कि डिफॉल्टर राइस मिलों के लिए सरकार की ओर से वन टाइम सेटलमेंट नीति घोषित किए जाने की भी तैयारी है। प्रस्तावित नीति में निर्धारित शर्तों के तहत मूलधन, ब्याज और पेनल्टी में छूट का प्रावधान हो सकता है। इसका उद्देश्य ऐसे मिलों से लंबित सरकारी बकाया का निपटारा कर अधिक से अधिक राशि की रिकवरी सुनिश्चित करना है। विभाग की मौजूदा सख्ती और प्रस्तावित ओटीएस नीति को मिलाकर देखा जाए तो आने वाले दिनों में डिफॉल्टर राइस मिलों से सरकारी बकाया की वसूली और तेज होने की उम्मीद है।