संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जीवनशैली में बदलाव व कॅरिअर की दौड़ व रिश्तों की चुनौतियां मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही हैं। अक्सर बिना वजह उदासी घेर लेती है, अकेलापन महसूस होता है और नींद, भूख और मनोबल गायब हो जाते हैं। जिला नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य बताते हैं कि लोग मनोरोग विशेषज्ञ के पास जाने से झिझकते हैं। परिवार या पड़ोसी क्या सोचेंगे, इसी डर से मरीज मदद से दूर रहते हैं। डिप्रेशन, ओसीडी और अल्जाइमर जैसी मानसिक स्थितियां किसी भी सामान्य बीमारी की तरह इलाज योग्य हैं।
अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में रोजाना सैकड़ों लोग परामर्श के लिए आते हैं, जिनमें करीब 45 प्रतिशत युवा कॅरिअर और रिश्तों के तनाव से जूझ रहे हैं। पिछले एक साल में लगभग 60 प्रतिशत मरीजों को केवल काउंसलिंग के जरिये सुधार मिला है। काउंसलिंग में मरीज के विचार और डर को समझा जाता है और व्यवहार व सोच बदलने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
सौभाग्य कौशिक ने बताया कि इस साल विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम है आपातकालीन परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच। इसका उद्देश्य है अधिक से अधिक लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और उन्हें उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराना, चाहे स्थिति आपातकालीन हो या सामान्य। इस दिशा में पूरे अक्टूबर माह में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सार्वजनिक स्थानों पर सेमिनार और वर्कशॉप आयोजित किए जाएंगे। इसका लक्ष्य है बच्चों, युवाओं, महिलाओं और सभी सामाजिक समूहों तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता को पहुँचाना। यह अभियान स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय की गाइडलाइंस के अनुसार संचालित होगा और पूरे अक्टूबर महीने तक जारी रहेगा।
प्रभावी थेरेपी-
- कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी : नकारात्मक विचार बदलने में मदद।
- स्ट्रेस मैनेजमेंट : तनाव पहचानने और नियंत्रित करने की तकनीक।
- माइंडफुलनेस : वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करना और मानसिक शांति बढ़ाना।
- मेडिटेशन : मानसिक थकान कम करना और सकारात्मक सोच बढ़ाना।
- सपोर्ट ग्रुप्स और काउंसलिंग : खुलकर अनुभव साझा करने का अवसर।
तनाव कम करने के उपाय
नियमित व्यायाम करें, दिन में कम से कम 30 मिनट योग।
पर्याप्त नींद लें, 7 से 9 घंटे नींद जरूरी।
फोन और स्क्रीन टाइम घटाएं।
मनपसंद गतिविधियों में समय दें
संगीत, पढ़ाई, खेल या घूमना।
अपनी भावनाएं साझा करें।