कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की पार्किंग में सरेआम अवैध
वसूली की जा रही है। वाहन खड़ा किया जाए या नहीं, पार्किंग का मीटर अस्पताल
गेट के अंदर वाहन आते ही घूम जाता है।
वाहन चालक इसका विरोध जताते हैं,
लेकिन पार्किंग ठेकेदारों के कई कारिंदे होने के कारण वाहन चालक की नहीं
चलने देते। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के अफसरों को शिकायत की जाती है,
लेकिन कार्रवाई नहीं होती। इससे अफसरों की ठेकेदार के साथ मिलीभगत से इंकार
नहीं किया जा सकता।
पार्किंग ठेकेदार पूरे मेडिकल कॉलेज का मालिक बना बैठा
है। कॉलेज में यह व्यवस्था अधिकारियों की लापरवाही को दर्शा रही है।
मेडिकल कॉलेज में जिले के अलावा आसपास के लोग भी इलाज के लिए आते हैं। 1200
मरीजों की ओपीडी है और करीब एक हजार लोग मरीजों के साथ आते हैं। इनमें से
अधिकतर के पास दो पहिया या चार पहिया वाहन होता है। मरीजों को छोड़कर वापस
जाने वालों से भी पर्ची काटी जाती है।
बाइक की 10 रुपये और चार पहिया वाहन
की 20 रुपये की पर्ची काटी जाती है ,जबकि रिकार्ड में बाइक के पांच रुपये
और कार की 10 रुपये की पर्ची काटी जा सकती है। लोगों का कहना है कि यह
अंधेरगर्दी अफसरों की मिलीभगत से हो रही है। यदि डीसी इसकी जांच करवाएं तो
मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत जगजाहिर हो सकती है। लोग
बताते हैं कि ठेकेदार धमकी देता है कि शिकायत जहां मर्जी कर लें। यहां पर
प्रशासन के नहीं खुद के नियम चलते हैं। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. पीयूष
शर्मा भी ठेकेदार की भाषा बोलकर वाहन चालकाें पर ही दोष मड़ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के चारों ओर बैठा दिए कारिंदे
मेडिकल
कॉलेज में दो गेट हैं। मैन गेट की एंट्री करके पार्किंग बनी है। यदि वाहन
चालक पार्किंग स्थल पर जाएंगे तो पर्ची कटवाएंगे। ठेकेदार ने अधिकारियों के
साथ सेटिंग करके दोनों गेट पर कारिंदे पर्ची लेकर बैठा दिए हैं। यदि कोई
वाहन चालक पर्ची न कटवाए तो वाहनों के टायरों की हवा निकाल दी जाती है।
इससे मेडिकल कॉलेज में आने वाले लोग बहुत परेशान हैं। हालत यह है कि कई बार
लोगों से मारपीट तक की जा चुकी है। इतना ही नहीं मेडिकल कॉलेज में काम
करने वाले कई लोग भी ठेकेदार और उसके कारिंदों की मारपीट के मामले झेल चुके
हैं। मेडिकल कॉलेज की पुलिस चौकी में कई महीने पहले शिकायत तक की जा चुकी
है। पूरे मेडिकल कॉलेज का ठेका नहीं दिया गया है। नियमाें के तहत पार्किंग
पर 24 घंटे के पैसे लिए जाने चाहिए, लेकिन ठेकेदार के नियम के मुताबिक 12
घंटे के बाद आगे का चार्ज जोड़ दिया जा रहा है।
शिकायत पर नहीं होती जांच
शहर
स्थित आरकेपुरम के सुनील कुमार शनिवार को मरीज व साथ में परिजनों को खाना
देने आए। वह ठेकेदार को कहते रहे कि दो मिनट में जा रहा हूं, लेकिन ठेकेदार
नहीं माना और 10 रुपये की पर्ची थमा दी। कृष्णा कॉलोनी के प्रदीप कुमार
बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज में सरेआम लूट मचा रखी है। कॉलेज में 10 मिनट
कार खड़ी रखी और ठेकेदार 20 रुपये ले गया। इसकी शिकायत अधिकारियों को की,
लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने डीसी से गुहार लगाई की नियमों
के वितरीत जाने वाले ठेकेदार पर कार्रवाई हो।