करनाल। कृषि विज्ञान केंद्र राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान में फल-सब्जी संरक्षण और उन्नत वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग पर आयोजित पांच दिवसीय दो विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन हुआ। ग्रामीण महिलाओं, युवाओं और भावी डेयरी उद्यमियों को संसाधन दक्षता और एकीकृत कृषि प्रणाली के गुर सिखाए गए। केंद्र के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार सारस्वत ने बताया कि देश में लगभग 15-20 प्रतिशत फल-सब्जियां आपूर्ति श्रृंखला या उपभोक्ता स्तर पर बर्बाद हो जाती हैं। संसाधन दक्षता का पहला नियम इस बर्बादी को रोकना है। महिलाओं ने जैम, सॉस और अचार बनाने के व्यावहारिक तरीके सीखे। प्रशिक्षण की समन्वयक डॉ. सोनिया ने टोमेटो सॉस, आम का अचार, आम पन्ना, चुकंदर का जैम, चुकंदर की कांजी, सेब का जैम और घिया की बर्फी बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। संवाद