कुरुक्षेत्र में गीता जयंती के अवसर श्रीजयराम विद्यापीठ के 22वें सामूहिक विवाह समारोह में शुक्रवार को 32 कन्याओं के हाथ पीले किए गए।
ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित श्री जयराम विद्यापीठ पर इस मौके पर हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा एवं श्रीजयराम संस्थाओं के अध्यक्ष एवं उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कन्यादान किया और नवदंपत्तियों को आशीर्वाद दिया।
उल्लेखनीय है कि श्री जयराम संस्था के संस्थापक ब्रह्मलीन देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने गीता जयंती पर सामूहिक विवाह समारोह की परंपरा 1992 में शुरू की थी। हर साल की तरह इस बार भी यह कार्यक्रम श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी के सानिध्य में दिल्ली के श्रीमती सारादेवी चैरिटेबल ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा कराया।
सारादेवी चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन राम लाल गोयल और उनके परिवार के सदस्यों ने विधिपूर्वक मंत्रोच्चारण के साथ विद्वान ब्राह्मणों और कर्मकांडी पंडितों द्वारा 32 गरीब कन्याओं का सामूहिक विवाह संपन्न करवाया गया। इस अवसर पर विभिन्न जातियों से संबंध रखने वाले युवाओं का विवाह उनके धर्मानुसार करवाया गया। इस कार्यक्रम के दौरान गूगल ब्वाय कौटिल्य को श्री शांति स्वरूप अवार्ड देकर सम्मानित किया गया।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने बाकायदा गरीब कन्याओं के विवाह समारोह की सराहना करते हुए कहा कि समाज में जिस प्रकार हमें दहेज प्रथा को समाप्त करना और काफी हद तक बिना दहेज के युवाओं को शादियां करने के लिए प्रेरित किया है व सफलता प्राप्त की है, उसी प्रकार हमें आज कन्या भ्रूण हत्या रोकने का भी प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने श्री जयराम संस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था पिछले काफी समय से समाज सेवा के कार्यों में लगी हुई है और इस संस्था ने इन गरीब कन्याओं के विवाह की एक लंबी श्रृंखला स्थापित कर समाज के लिए उदाहरण ही नहीं स्थापित किया, बल्कि सभी धर्मों को एक ही स्थान पर जोड़ने का कार्य किया है।
जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने गरीब कन्याओं के विवाह के उपरांत नवदंपतियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह गरीब कन्याएं आज से उनकी बेटियां हैं और वह उनके हर सुख-दुख के साथी हैं।
उन्होंने कहा कि वह अपने गुरु ब्रहमलीन परम पूजनीय देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी जी की प्रेरणा से इस यज्ञ को हर वर्ष संपन्न करवा रहे हैं और उनका लक्ष्य प्रति वर्ष अधिक से अधिक गरीब कन्याओं के विवाह को संपन्न करवाने का है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह उनका लक्ष्य शीघ्र ही पूर्ण होगा।
नवदंपतियों को कहा कि वह सुख-दुख में एक-दूसरे के साथी ही न बनें, बल्कि समाज के लिए भी कार्य करें।