करनाल। मार्गशीर्ष अमावस्या को हिंदू धर्म में आत्म शुद्धि, पितृ तर्पण करने का दिन माना जाता है। पंचांग के अनुसार एक दिसंबर को मार्गशीर्ष अमावस्या मनाई जाएगी।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार मार्गशीर्ष अमावस्या पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है, जो उन्हें मोक्ष दिलाने में बड़ा सहायक हैं। अमावस्या तिथि पर राहु का प्रभाव बढ़ता है, इसलिए इस दिन शिवलिंग की पूजा जरूर करनी चाहिए।
मार्गशीर्ष अमावस्या की रात को ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति मिलती है। मार्गशीर्ष अमावस्या को पितरों का तर्पण और पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
मार्गशीर्ष अमावस्या 30 नवंबर शनिवार को सुबह 10 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी और एक दिसंबर रविवार को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन किए गए अनुष्ठान पितरों को मोक्ष दिलाने में सहायक होते हैं। गंगा या नदी में स्नान और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
विनोद शास्त्री के अनुसार अमावस्या के दिन राहु का प्रकोप बढ़ जाता है और राहु के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि इस दिन शिवलिंग की पूजा करें। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद शिवलिंग का अभिषेक करने से राहु का बुरा असर नहीं पड़ता। अमावस्या के अवसर पर तुलसी को अर्घ्य देने से सौ गुना फल की प्राप्ति होती है। संवाद