करनाल। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट पॉक्सो एक्ट मामले) गुनीत अरोड़ा की अदालत ने चचेरी बहन से दुष्कर्म के दोषी (पीड़िता के ताऊ के लड़के) को 20 साल की कैद और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। नाबालिग लड़की ढाई माह की गर्भवती हो गई थी, हाईकोर्ट के आदेश पर उसका गर्भपात भी करवाया गया। वहीं भ्रूण का मिलान होने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी पाया और सजा सुनाई।
कोर्ट के फैसले के अनुसार, 10 अगस्त 2020 को असंध थाना में आकर नाबालिग लड़की की माता ने शिकायत देकर बताया था कि उनकी तीन लड़कियां और एक लड़का है। सबसे छोटी बेटी की उम्र करीब 11 साल है। उनकी बेटी कई दिन से परेशान थी। कई बार बेटी को परेशानी का कारण पूछा गया तो नहीं बताया। बाद में बेटी की तबियत खराब हो गई तो वो उसे लेकर डॉक्टर के पास पहुंचीं। डॉक्टर ने बेटी का चेकअप करने के बाद अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी। उन्होंने अल्ट्रासाउंड करवाया तो वह गर्भवती निकली।
बेटी ने बताया कि आरोपी ने उसके साथ दो तीन-माह पहले गलत काम किया है। वो पशु बाड़े के ऊपर बने हुए कमरे के अंदर अकेली टीवी देख रही थी। आरोपी ने उसे किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। इसके बाद भी कई बार लगातार उसके साथ गलत काम करता रहा। शिकायत पर असंध थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करके आरोपी को गिरफ्तार किया। उसका मेडिकल करवाकर अदालत में पेश करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पीड़िता की कराई थी काउंसिलिंग
पीड़िता की काउंसलिंग करवाई गई। मेडिकल करवाया गया तो वह ढाई महीने की गर्भवती थी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर नाबालिग का गर्भपात कराया गया था। इस दौरान भ्रूण के सैंपल लिए गए और आरोपी के सैंपल भी लिए गए। जोकि मेडिकल रिपोर्ट में आपस में मैच हो गए। इस मामले में 15 लोगों की गवाही करवाई गई। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को 20 साल की कैद और 15 हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है। आरोपी पहले से जेल में बंद है।