फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साढे़ सोलह करोड़ से बना सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बना ‘वेस्ट’

Thu, 26 Dec 2013 11:12 PM IST
करनाल
विज्ञापन
विज्ञापन
करनाल शहर के कचरे के निष्पादन के लिए बनाया गया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट खुद ‘वेस्ट’ में तब्दील हो रहा है।
विज्ञापन


न तो शहर का कचरा रूटीन में उठ रहा है और न ही उद्घाटन के बाद से इस प्लांट में काम शुरू हो सका है। 25 हजार टन कचरा प्लांट में जमा है, जो पर्यावरण को दूषित कर रहा है।

विषैली मक्खियां व मच्छर इस गंदगी में पनप रहे हैं। जो शहर में पहुंचकर बीमारियां फैला रहे हैं। पूरा शहर कचरे और गंदगी से परेशान हैं। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। 16 करोड़ रुपये की लागत से बना यह प्लांट शहर के किसी काम का नहीं है।
विज्ञापन


दूसरे जिस इलाके में यह बनाया गया है, वहां के लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। भले ही शहर के नेता इसे अपनी उपलब्धियों में शुमार करते हों लेकिन शहर के लिए यह सुविधा से ज्यादा सिरदर्द बना हुआ है।

अंदाजे के अनुसार शहर में रोज अस्सी टन के करीब कचरा इकट्ठा होता है, इसे कहीं से तो कर्मी उठा लेते हैं और कई जगह इसमें लावारिश पशु मुंह मारते रहते हैं।

बनने से पहले हुआ था उद्घाटन
आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा ने बताया कि वर्ष 2003 में प्लांट के लिए गांव शेखपुरा में 15 एकड़ जमीन खरीदी गई थी, जिसके निर्माण का ठेका एनबीसीसी कंपनी को दिया गया था।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का उद्घाटन 18 नवंबर 2012 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किया था। जिस वक्त उद्घाटन हुआ, उस वक्त यह पूरी तरह से बनकर भी तैयार नहीं था और उद्घाटन के बाद यहां कचरा निस्तारण भी नहीं हुआ।

इस प्रोजेक्ट पर 16.58 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिनमें से 13.26 करोड़ रुपये केंद्र सरकार की तरफ से दिए गए थे और 331.68 लाख रुपये राज्य सरकार ने।

प्लांट से बाहर सड़क पर कचरा
लापरवाही की पराकाष्ठा है कि नगर निगम का सफाई अमला शहर से कचरा उठाकर प्लांट तक तो ले जाता है लेकिन प्लांट के अंदर डालने की जहमत नहीं उठाता।

प्लांट के बाहर ही सड़क पर कचरा डाला जा रहा है, जिससे सड़क पर गंदगी बढ़ गई है और प्लांट की दीवार भी दब चुकी है।

कंडम हो गए वाहन
प्लांट में खड़े वाहन भी धीरे-धीरे कंडम हो चले हैं। यहां खड़े ट्रैक्टरों के टायर कट-फट चुके हैं तो दो कार तकरीबन कंडम हो चुकी हैं।

प्रशासन की लापरवाही से लाखों रुपये की मशीनरी खड़े-खड़े जंग खा रही है और शहर के लोग कचरे व गंदगी से परेशान होकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।

कचरे में लगी आग, फैल रहा धुआं
प्लांट के अंदर चारों तरफ कचरा ही कचरा फैल गया है। कचरा निस्तारण नहीं होने से आसपास दम घोंट देने वाली बदबू फैल रही है।

हजारों टन कचरे में आग सुलग रही है, जिसके धुएं से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है। धुएं से आसपास के लोगों श्वास संबंधी दिक्कतें शुरू हो गई हैं।

स्टाफ को दो माह से नहीं मिला वेतन
बिल नहीं भरने के चलते सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का बिजली का कनेक्शन भी निगम ने काट दिया है।

प्लांट का तीन महीने का सवा लाख रुपये बिजली बिल नहीं भरा गया है। इतना ही नहीं, प्लांट में नियुक्त किए गए स्टाफ को पिछले दस महीने से वेतन तक नहीं दिया गया।

शहर हुआ कचरा-कचरा
भले ही शहर के कूड़े के निष्पादन को लेकर सरकारों ने 16.58 करोड़ रुपये खर्च करके कूड़े में डाल दिए हैं लेकिन शहर का कूड़ा फिर भी सड़कों पर फैल रहा है।

सेक्टर 6 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के बाशिंदों ने वीरवार को गंदगी से परेशान होकर प्रदर्शन किया और हुडा के खिलाफ नारेबाजी की।

बीमारी से हो चुकी हैं आठ मौतें
सेक्टर 6 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी लजवंत कौर, उमा रानी, संजय कंबोज, ओमप्रकाश कंबोज, मास्टर रमेश गिल, ममता, विजय कुमार, हरीश, रेणु, संयोगिता रानी, उषा रानी, सपना, लक्ष्मी व संतोष सहित अन्य ने बताया कि कूड़े और गंदगी की वजह से फैल रही बीमारियों के चलते कॉलोनी में आठ लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग बीमार हैं।

कई बार प्रशासन से कूड़ा उठाने का स्थायी बंदोबस्त करने की गुहार लगाई गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।

सांसद निवास के पास ही फैला है कूड़ा
कॉलोनी निवासियों का कहना है कि सांसद डॉ. अरविंद शर्मा से कई बार इस समस्या के समाधान के लिए शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

खुद सांसद का निवास भी इस स्थान से कुछ ही दूरी पर है। वे इसी सड़क से गुजरते हैं। इसके बावजूद भी कचरा उठवाने के लिए कार्रवाई नहीं करवाते।

कचरे की आग से फैलती हैं जानलेवा गैसें
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही एनजीओ ग्रीन अर्थ की डायरेक्टर डॉ. वरिंदर कौर ने बताया कि कूड़ा-कचरे में लगाई गई आग से उठने वाले धुंए में सल्फर आक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर, क्लोरीन फ्री रेडिकल्स निकलते हैं, जो सेहत के लिए बहुत खतरनाक होते हैं।

इससे डाईओक्सीन गैसें निकलती हैं, जो कारसिनोजेनिक होती हैं और इनसे कैंसर फैलता है। सर्दी के मौसम में इन गैसों और धुंध व नमी के मिश्रण से नाइट्रिक एसिड व सल्फ्यूरिक एसिड बनता है, जो आंखों, श्वास संबंधी रोगों और गुर्दाें संबंधी रोग होने का खतरा रहता है।

संस्था के पर्यावरण विशेष डॉ. नरेश भारद्वाज ने बताया कि कचरा जलाना म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2000 की अवहेलना है। इसकी एवज में कार्रवाई का प्रावधान है।

एक महीने तक शुरू कर देंगे प्लांट
प्लांट को ऑपरेट करने वाली कंपनी हाइड्रेयर टेक्टोनिक्स पीसीडी लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर राजीव का कहना है कि फिलहाल कंपनी के सामने वित्तीय समस्याएं हैं।
विज्ञापन


इनका समाधान किया जा रहा है। जल्दी ही इस प्लांट को शुरू कर दिया जाएगा।

अभी निर्माण कार्य बाकी है
प्लांट निर्माण करने वाली कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी के डीजीएम सोहन लाल ने बताया कि निर्माण कार्य अभी चल रहा है।

इसमें कुछ और समय लगेगा। बता दें कि प्लांट का उद्घाटन 18 नवंबर 2012 को निर्धारित अवधि से एक साल लेट किया गया था, जबकि निर्माण करने वाली कंपनी अब एक साल बाद भी इसे पूरा नहीं कर सकी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें