संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। श्रम विभाग की कर्मकार सन्निर्माण योजना में घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। गृहणियों को लाभ दिलवाने के लिए बिचौलियों ने उनके परिवार पहचान पत्र में रुपये लेकर व्यवसाय में तबदीली करवाई थी।
इस कार्य के लिए उन्होंने एक गृहिणी से हजार रुपये लिए थे, योजना का लाभ दिलवाने के लिए उन्होंने गांव व उस क्षेत्र के अटल सेवा केंद्र व सीएससी केंद्र से संपर्क कर फर्जी श्रमिकों को लाभ दिलवाया।
इन बिचौलियों के संपर्क में विभाग के ऐसे कर्मचारी भी थे, जिन्हें इन फर्जी श्रमिकों के 90 दिन के रोजगार का सत्यापन करना था। जैसे-जैसे महिला श्रमिकों के खाते में 18100 व पुरुष के खाते में 13100 रुपए का श्रमिक सम्मान भत्ता आना शुरू हुआ तो लोगों का बिचौलियों में विश्वास बनता चला गया। सरकार से लाभ प्राप्त कर चुके इन श्रमिकों ने बिचौलियों के बारे में अन्य लोगों को बताया। अटल सेवा केंद्रों या सीएससी केंद्रों के माध्यम से सरकारी रेट पर लेबर कॉपी संबंधित सभी कार्य कराए गए।
इस काम की एवज में लोगों से 10 गुना ज्यादा पैसा वसूला गया। लोगों ने भी इस लालच में कि 15 से 20 दिनों में उनके खाते में रुपये आएंगे, बिचौलियों को अग्रिम राशि भी दी। इसी क्रम में सरकार के राजस्व नुकसान का सिलसिला चलता गया। इस पूरे घटनाक्रम में बिचौलियों की भूमिका सबसे सक्रिय रही। इस दौरान कई लोगों ने अपने शुरुआती व्यवसाय, फेरी छोड़कर भी बिचौलिए का काम शुरू कर लिया था।