करनाल। कोरोना वायरस की तरह लंपी वायरस के भारत में प्रवेश के पीछे पड़ोसी मुल्क का कनेक्शन सामने आया है। कुछ महीने पूर्व दक्षिण अफ्रीका से चला यह विषाणु जनित रोग पाकिस्तान के जरिये भारत में प्रवेश कर गया। जिसने पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान जगत और पशुपालकों की नींद उड़ा दी है।
इस वायरस के पाकिस्तान से आने की पुष्टि लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रणबीर सिंह बिसला ने की। उन्होंने कहा कि वायरस कहीं से भी आ सकता है। पिछले वर्षों में देश में इस रोग के बहुत कम मामले मिलते थे। इसके नियंत्रण के लिए कोई वैक्सीनेशन कार्यक्रम भी नहीं था। करनाल जिले में गाय और भैंसों की संख्या करीब 3.56 लाख है। शनिवार तक जिले में 20 पशुओं में इस रोग की पुष्टि हुई है। इस विषाणु की चपेट में गाय और भैंस दोनों आ सक ते हैं। गाय की सभी नस्लें इस रोग के प्रति ज्यादा संवेदनशील मानी जाती हैं।
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गोटफोक्स वैक्सीन की 50 हजार डोज मांगी, जल्दी शुरू होगा टीकाकरण
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. धर्मेंद्र ने कहा कि यह विषाणु जनित रोग दक्षिण अफ्रीका से चला था और पाकिस्तान से भारत में घुस गया। लंपी वायरस की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। गोटफोक्स वैक्सीन की 50 हजार डोज की विभाग से मांग की है। बहुत जल्दी टीकाकरण अभियान शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में रिंग वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत जिस गांव में वायरस के लक्षण मिले हैं उस पूरे गांव को सील करके सभी पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा। पशुपालकों को थोड़ी एहतियात बरतने की जरूरत है। यदि रोग के लक्षण प्रतीत हों तो बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें। इस रोग से कमजोर, वृद्ध और लावारिस पशुओं में पांच प्रतिशत तक मौत की संभावना होती है। पशुओं के बाड़े में नेट लगा दें। मक्खी-मच्छर के काटने से यह रोग आता है। नेट से मक्खी-मच्छर की रोकथाम रहेगी। फिलहाल जिले में पशु मेले और अन्य गतिविधियां प्रतिबंधित कर दी गईं हैं।
वर्जन
करनाल और आसपास के जिलों में लंपी वायरस के मामले सामने आ चुके हैं। विभाग सतर्क हैं। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में जो भी पशुपालक जांच के लिए आता है उसे पशुपालन विभाग भेज दिया जाता है। केंद्र में सर्जरी व गायनी के विशेषज्ञ वैज्ञानिक उपलब्ध हैं।
-- डॉ. अनीता गांगुली, क्षेत्रीय निदेशक, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, करनाल