110.... काव्य गोष्ठी में उपस्थित कारवाने अदब के सदस्य। स्वयं
करनाल। कारवाने अदब की ओर से मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन जिमखाना क्लब में किया गया जिसमें साहित्यकारों ने रचनाएं पेश कर वाहवाही लूटी। दलीप खरेरा ने कहा- जिंदगी के रंगमंच पर कितने किरदार निभाए हैं...। प्रवीण जन्नत ने कहा- इस वसुधा पर वैसे तो बनते मिटते देश अनेक, गर्व से जो कहलाता ऐसा तो भारत ही है एक। कृष्ण कुमार निर्माण कुछ इस अंदाज में बोले- भेड़ की खाल में हैं भेड़िये देखिए, बताओ इनसे मेमने कैसे बचें। धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर ने लोगों के दिलों में देश भक्ति का जोश भरते हुए कहा- जय हिंद का नारा जो इस दिल से लगाते हैं, वो अमर फरिश्ते ही इतिहास बनाते हैं।
तरावड़ी से जय भारद्वाज ने कहा, थिरक रही है राय किसी की ठुमक रहा सवाल है, माहौल में गर्दो गुबार बवाल ही बवाल है। गुरमुख सिंह वड़ैच ने आज के माहौल पर कटाक्ष करते हुए कहा, सबसे न मिला करो, इतनी सादगी के साथ, वो दौर अलग था ये लोग अलग है। इस अवसर पर सलीम जावेद कैरानवी, डाॅ. कमर रईस, इकबाल पानीपती, मनोज मधुरभाषी, आशीष ताज, कर्णजीत मान, रविंद्र सरोहा और ईश्वर सिंह ने भी अपनी रचनाएं पढ़ीं।
मुख्य अतिथि डॉ़ क़मर रइस व विशिष्ट अतिथि के रूप में गुरमुख सिंह वड़ैच और सलीम जावेद कैरानवी रहे।