करनाल। कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों की गोली से जान गंवाने वाले लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी के दिमाग में अभी भी वहीं खौफनाक मंजर घूम रहा है। जिसके दृश्य रह-रहकर उसके दिमाग में आते हैं और वह फफक कर रोने लगती है। शादी से खुशियों के बीच शुरू हुए नए जीवन में अचानक पति का साथ छूटने के बाद वह बेसुध है। परिवार के सदस्य उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं।
शुक्रवार को घर आए लोगों व विनय के स्कूल के शिक्षकों से बात करते हुए मां ने कहा कि कश्मीर के पहलगाम में जब यह घटना हुई तो मेरे लाल को प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाया। सेना के जवानों के पास यह सुविधा होती है लेकिन मेरा बेटा उस समय ड्यूटी पर नहीं था। वह घूमने गया हुआ था। गोली लगने के बाद बहू हिमांशी ने भी उसे अपने स्तर पर मदद करने का प्रयास किया लेकिन वह इस कोशिश में नाकाम रही। यदि उसे स्थानीय लोगों या सेना की मदद मिल जाती तो बेटा बच जाता।
शुक्रवार को लेफ्टिनेंट विनय की अस्थि विसर्जन के लिए दो गाड़ियों से परिवार के सदस्य हरिद्वार गए। जिस समय पिता और अन्य लोग घर से जा रहे थे, उस समय भी विनय की पत्नी हिमांशी, मां और बहन सहित अन्य लोग फफक कर रो रहे थे। सभी की आंखों से निकलते आंसू बेटे की अस्थियों को अंतिम विदाई दे रहे थे। पिता राजेश नरवाल, चचेरे भाई, फूफा, मामा और ताऊ सहित अन्य लोग हरिद्वार गए थे।
शुक्रवार को मॉडल टाउन स्थित शिवपुरी में लेफ्टिनेंट विनय की अस्थियों को सुबह एकत्रित किया गया। जिसके बाद हरिद्वार में उसे मां गंगा की गोदी में प्रवाहित किया। पिता के हाथों बेटे की अस्थियों का विसर्जन होने की बात से पूरा दिन घर में भी सभी की गला भर आया। घर में आए लोगों की भी यह वाक्य सुन आंखें नम हो गईं। विदित हो कि विनय नरवाल अपने परिवार का इकलौता बेटा था।
घर पर रंगीन चुन्नियों की जगह सफेद चादर ने ली
16 अप्रैल को बेटे की शादी की खुशी में सेक्टर-7 स्थित लेफ्टिनेंट विनय के आवास को विशेष रूप से सजाया गया था। दो दिन पहले ही रंगीन चुन्नियों से सजावट हो गई थी। 19 को रिस्पेशन हुआ, इसके बाद तक घर में टेंट, सजावट और शादी का अन्य सामान अभी सिमटा नहीं था कि 22 अप्रैल को इसी बेटे की आतंकी हमले में हुई मौत के बाद घर को सफेद टेंट ने ढक लिया है। जहां तब जश्न मनाया जा रहा था, वहां अब रुदन सुनाई पड़ रहा है।