खेल सभी के लिए, सभी के सहयोग से’ नारे के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल
खट्टर द्वारा प्रदेश की नई खेल नीति की घोषणा के बावजूद जिले में खेलों की
स्थिति बदतर है।
कहीं पर स्टेडियम है तो वहां पर कोच नहीं हैं, कहीं पर कोच
है तो वहां पर मैदान नहीं है। जिले के सबसे बड़े कर्ण
स्टेडियम कर्ण
स्टेडियम के हालात खस्ता हैं और देखभाल के अभाव में यहां प्रतिभाएं दम तोड़
रही हैं। जिलास्तर के स्टेडियम के साथ साथ कस्बों के स्टेडियम के भी हालात
बुरे हैं। जिले की बात करें तो यहां मौजूदा समय में 24 स्टेडियम हैं,
लेकिन इनमें से कोई स्टेडियम ऐसा नहीं है, जहां खिलाड़ियों के लिए सभी
सुविधाएं मुहैया हों।
हाल यह है कि इनमें से कुछ स्टेडियम भैंसों के चरागाह
बन गए हैं। कहीं शौचालय नहीं है तो कहीं बाथरूम, जहां यह ठीक हैं वहां
पानी की व्यवस्था नहीं है। जहां दोनों सही हैं वहां के स्टेडियम से टूटी ही
चोरी कर लिए गई हैं। जहां यह सब ठीक है वहां इनडोर खेल के लिए हाल की कोई
व्यवस्था ही नहीं है।
कुछ में लाइट का बंदोबस्त आज तक नहीं हो पाया। कुछ
में कोच नहीं हैं तो कहीं खेल का सामान। हाल यह है जिले में कई स्टेडियम तो
ऐसे हैं जो बनने के बाद से लेकर आज तक किसी ने देखे ही नहीं। इनका ख्याल न
तो पंचायतों का ही आया न ही खेल विभाग को। बहरहाल खेल विभाग व पंचायतों की
अनदेखी का खामियाजा जिलेभर के खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है और
खिलाड़ियों की पौध पनपने से पहले ही दम तोड़ रही है।
5 खेलों के कोच का अरसे से इंतजार
कबड्डी,
बैडमिंटन, जूडो, क्रिकेट, वेटलिफ्टिंग के कोच का लंबे समय से जिले के
खिलाड़ियों व खेल स्टेडियम को इंतजार है। इन खेलों का एक भी कोच जिले में
नहीं है। बिना कोच के ही खिलाड़ी करीब 3 साल से अपने ही दम पर राजीव गांधी
ग्रामीण खेल योजना (पायका) या अन्य खेलों में प्रदर्शन कर रहे हैं। कोई
प्राइवेट कोच से कोचिंग ले रहा है तो कोई जिले से बाहर जाकर अपनी खेल
प्रतिभा को सुधारने के लिए प्रयासरत है।
ग्राउंड मैन भी सिर्फ पूरे जिले में दो
जिलेभर
में केवल दो ही ग्राउंड मैन हैं। इन्हीं के भरोसे पूरे मैदान को तैयार
किया जाता है। खेल विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि जिले में कम से कम 15
ग्राउंड मैन की कमी है। इतना ही नहीं सभी खेल स्टेडियम में केवल अनुबंध के
आधार पर एक-एक चौकीदार ही रखा गया है। वह भी न के बराबर है। यही कारण है कि
खेल स्टेडियम से सामान व टूंटी इत्यादि की चोरी होना आम सी बात है।
ये हैं जिले के राजीव गांधी खेल स्टेडियम
गांव
पुंडरक, कलरी जागीर, गगसीना, घोघडीपुर, बसताड़ा, निगदू व जयसिंहपुरा में
जिले के राजीव गांधी खेल स्टेडियम हैं। इन सभी में तमाम व्यवस्थाएं खेल
विभाग को करनी होती हैं। यह सभी सरकार के अधीन हैं।
बाक्स
यहां हैं मिनी स्टेडियम
चोचड़ा,
घरौंडा, सरफा खास, मूनक, श्यामगढ़, गुरुकुल मोरमाजरा, जबाला, ददलाना व
कोंहड इन गांवों में पंचायतों द्वारा दी गई जगहचमें जिला खेल विभाग के
द्वारा पंचायती/ मिनी स्टेडियम बनवाए गए हैं। इसके अलावा, एससी कंपोनेंट के
तहत गांव कुड़क, कल्सी जागीर व हसनपुर में एससी कंपोनेंट के तहत मिनी खेल
स्टेडियम बनाए गए हैं। वहीं, प्ले फिल्ड सूची के तहत काछवा, गढ़ी जाटान,
बजीदा जाटान, चोरपुरा व कुरलन में प्ले फिल्ड स्टेडियम हैं।
यहां बनने हैं स्टेडियम
गांव
जलमाना, गांव मोदीनपुर, इंद्रगढ़ में तीन और नए खेल स्टेडियम बनाए जाने
हैं। गांव बल्ला में हाल यह है कि वहां करीब पिछले 5 वर्षों से खेल
स्टेडियम निर्माणाधीन है।
दम तोड़ रही प्रतिभाएं
इस बार पायका के लिए
जिले में करीब 10 लाख रुपये का बजट जारी हुआ था। पायका के तहत खंड स्तर पर
करीब 2200, जिले स्तर पर 1500 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। हालांकि तमाम
असुविधाओं के बावजूद जिले के खिलाड़ियों ने राज्यभर में अपनी धाक पायका के
तहत जमाकर अपना लोहा मनवाया है। सरकार की एक भी सुविधा न मिलने के बावजूद
स्पीड टेस्ट में भी जिले के करीब 200 खिलाड़ियों ने अपने बुलंद इरादों से
जगह बनाई है। सुविधाएं नहीं मिलने के कारण यह प्रतिभाएं आगे दम तोड़ जाती
हैं। खिलाड़ी वेदपाल, खिलाड़ी राजेश कुमार आदि ने बताया कि अगर स्टेडियम
में बेहतर सुविधाएं हों तो करनाल के खिलाड़ी भी दुनिया में धाक जमा सकते
हैं। राजीव मलिक, प्रीति आदि खिलाड़ियों ने सुधार की मांग की है।
कैसे चलेंगी खेल नर्सरी
गांव
चौरकारासा वालीबॉल व कबड्डी की, कर्ण स्टेडियम में एथलेटिक्स, वालीबॉल व
फेंसिंग इसके अतिरिक्त गांव बड़ौता में रेस्लिंग की खेल नर्सरी एक सितंबर
से शुरू हो जाएगी, लेकिन यहां भी सवाल वहीं है कि यहां बिना कोच व सुविधाओं
के कैसे इन खेल नर्सरियों में जिले के 200 खिलाड़ी कुछ सीख पाएंगे। एक खेल
नर्सरी के लिए 25 बच्चों पर एक कोच होना चाहिए, लेकिन कबड्डी व रेसलिंग को
तो एक भी कहीं भी कोच नहीं है।
जिले में जिन कोच की कमी है,
उन्हें सरकार जल्द ही भेज देगी। खेल स्टेडियम हमारे सही हैं। थोड़ी बहुत
जहां दिक्कतें हैं उनके लिए पंचायती राज विभाग को एस्टिमेट बनवाने के लिए
भेजा है। जल्द ही वहां सभी दिक्कतें दूर हो जाएंगी। सरकार खेलों व
खिलाड़ियों पर ध्यान रखते हुए तमाम सुविधाएं देने के लिए प्रयासरत है। खेल
नर्सरी खुलने से पहले कोच भी आ जाएंगे।
सत्यदेव मलिक, जिला खेल अधिकारी, करनाल।