रिजल्ट में देरी और हेराफेरी, डीएमसी के बंडल चोरी और अंकों
में अदला-बदली ही नहीं, बल्कि परीक्षा परिणामों की घोषणा में अति विलंब से
लेकर परीक्षार्थियों के रजिट्रेशन नंबर एवं फोटो परिवर्तन जैसी बड़ी
खामियां केयू परीक्षा शाखा पर धब्बा बन चुकी है।
परीक्षार्थियों के
मुताबिक कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी सिर्फ नाम की ए ग्रेड यूनिवर्सिटी है,
जबकि हालात किसी सी ग्रेड से भी गए गुजरे हैं।
हैरत की बात ये है
कि अगला सेमेस्टर की परीक्षा होने तक भी पिछले सेमेस्टर के रिजल्ट घोषित
नहीं होते। इस बार बीटेक चौथे सेमेस्टर का रिजल्ट उस समय आया, जब बगैर
रिजल्ट के चौथे से अगले सेमेस्टर में प्रवेश कर चुके विद्यार्थी पांचवें
सेमेस्टर की परीक्षाएं दे रहे हैं।
केयू परीक्षा शाखा में अब ताजा
मामला इंदिरा गांधी नेशनल कॉलेज में अध्ययनरत बीकॉम की छात्रा प्रविंद्र
कौर पुत्री सुरेंद्र सिंह मलिक का सामने आया है। इस छात्रा के लिए केयू से
बीकॉम की सही डीएमसी हासिल करना ही टेढ़ी खीर बना हुआ है।
छात्रा
के मुताबिक उसकी डीएमसी वास्तविक रजिस्ट्रेशन नंबर-09आईएल 255, जिस पर उसका
फोटो असली लगा हुआ था, लेकिन दिसंबर 2012 में केयू की परीक्षा शाखा ने
उसका रजिस्ट्रेशन नंबर कर 09 आईपीएल 255 की जगह 10 आईएल 255 कर दिया।
छात्रा के मुताबिक रजिस्ट्रेशन नंबर पर उसका व पिता का नाम वही, लेकिन उसकी
फोटो की जगह किसी पुरुष की फोटो लगी हुई है। इन्होंने बताया कि वर्ष 2011
में बीकॉम तीसरे सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम को भी छह माह बाद बदल कर उसे
फेल कर दिया गया है।
इन्होंने अमर उजाला को बताया कि केयू के
दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि दिसंबर 2011 में तीसरे सेमेस्टर का रिजल्ट
घोषित हुआ था। प्रविंद्र कौर के मुताबिक उसे यह रिजल्ट कुरुक्षेत्र
यूनिवर्सिटी की परीक्षा शाखा में आकर तीन माह बाद हैंडमेड प्रोविजनल रिजल्ट
के रूप में थमाया गया था।
खुद केयू की परीक्षा शाखा द्वारा दिए गए
इस रिजल्ट के छह माह बाद कॉलेज में जो डीएमसी भेजी गई उसके अनुसार वह छह
में से चार पेपरों में फेल दिखाई गई, जबकि केयू ने उसे प्रोविजनल रिजल्ट
देते समय सभी पेपरों में पास लिख कर दिया था।
इसके बाद जब उन्होंने
केयू में आकर परीक्षा शाखा में तैनात महिला अधिकारी से संपर्क किया तो
उन्होंने हैंडमेड प्रोविजनल रिजल्ट(पास) देते समय हुई गलती को स्वीकार
करते हुए लाडवा कॉलेज में भेजी गई डीएमसी (फेल) को ही सही बताया। छात्रा के
मुताबिक वह और उनके परिवार के सदस्य केयू में कुलपति, रजिस्ट्रार और इनके
निचले स्तर के अधिकारियों के अलावा स्टाफ कर्मचारियों से कई बार मिल चुके
हैं, लेकिन उनकी एवं उन जैसे अनेक विद्यार्थियों की समस्याएं जस की तस हैं।
बीटेक के विद्यार्थियों का कहना है कि जहां अगले सेमेस्टर की
परीक्षाओं के दौरान या बाद में पिछले सेमेस्टर के रिजल्ट घोषित किए जा रहे
हैं, वहीं रिजल्ट घोषित होने पर जिन विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट होती है,
उन्हें कंपार्टमेंट के फार्म फार्म के साथ-साथ री चेकिंग का फार्म भी भरना
होता है। रीचेकिंग का रिजल्ट कंपार्टमेंट के पेपर देने के बाद घोषित होता
है। रीचेकिंग में जो बच्चे पास होते हैं, उनकी कंपार्टमेंट की तैयारी के
लिए सारी मशक्कत धरी रह जाती है।
पिछले रिजल्ट से डिप्रेशन
बीटेक
पांचवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों के अनुसार इस बार चौथे सेमेस्टर का
रिजल्ट ऐन उस वक्त घोषित किया गया, जब वे पांचवें सेमेस्टर की परीक्षाओं
में जुटे हुए थे। पांचवें सेमेस्टर की परीक्षाओं के दौरान चौथे सेमेस्टर के
एक, दो या इससे अधिक पेपरों में फेल होने का असर उनकी पूरी तैयारी पर
पड़ा।
रजिस्ट्रार ने माना सुधार की है गुंजाइश
केयू के
रजिस्ट्रार डॉ.केसी रल्हाण ने स्वीकार किया कि परीक्षा शाखा की
कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने छात्रा प्रविंद्र
कौर के मामले की पुष्टि करते हुए आश्वासन दिया की जो भी गलती हुई है उसे
दूर किया जाएगा।