इंटरनेशनल स्तर के पर्यटन स्थल की तरह विकसित होगी कर्णझील
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दानवीर कर्ण के नाम से विख्यात कर्णझील को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मापदंडों को मद्देनजर रखते हुए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस विषय को लेकर स्थानीय कर्ण झील पर मंगलवार को पर्यटन विभाग के निदेशक समीर पाल सरों की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस मौके पर डीसी मंदीप सिंह बराड़ भी उपस्थित थे।
डीसी बराड़ ने निदेशक के समक्ष कर्णझील के संदर्भ में मांगे रखते हुए कहा कि सबसे पहले इसका बेहतरीन सौंदर्यीकरण होना चाहिए। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था के साथ बेहतरीन शौचालय व्यवस्था हो। लाइट एंड साउंड कार्यक्रम समय-समय पर होते रहने चाहिए। इतना ही नहीं खजुराहो और सूरजकुंड की तर्ज पर प्रेरक और सांस्कृतिक मेलों का आयोजन हो। डीसी ने बैठक में सुझाव देेते हुए कहा कि कर्णझील पर हरियाणा की संस्कृति और सभ्यता को परिभाषित करते एक हैरीटेज विलेज की भी स्थापना होनी चाहिए ताकि भावी पीढ़ी हमारी धरोहर से नई सीख ले सके।
डीसी की मांगों पर निदेशक ने विचार करते हुए सुझावों की प्रशंसा की और कहा कि इन्हें कार्यरूप में परिणित करने के पूरे प्रयास किए जाएंगे। बैठक में उन तमाम सम्भावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया जो कर्ण लेक को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ख्याती प्रदान कर सके। निदेशक ने विभागीय और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को कहा कि नहर के ऊपर ऐसा पुल बनाया जाए जो ओएसियस और कर्ण लेक को जोड़ता हो और साथ ही टूरिज्म विभाग के अधिकारी कर्ण लेक पर पहले से ही बने कमरों को बेहतरीन तरीके से नया रूप दें ताकि बाहर से ही पता चले की यह हरियाणा टूरिज्म हैं। ओएसियस और कर्ण झील की कनेक्टिविटी को लेकर अधिकारियों ने बताया कि ऐसे पुल के निर्माण कार्य पर लगभग चार करोड़ रुपये की लागत आ सकती हैं।
कांपलेक्स में मौजूद रेस्तरां, गिफ्ट शॉप, बार और बोटिंग सुविधा में भी विस्तार किया जाए। इस मौके पर उपस्थित उपायुक्त मंदीप सिंह बराड़ ने सभी विभागों के अधिकारियों से नवीनीकरण से संबंधित सुझाव भी आमंत्रित किए। इस मौके पर चंडीगढ़ से आए अधिकारी मुकुल कुमार, नगरनिगम आयुक्त आदित्य दहिया, एसीयूटी प्रीति, एसडीएम योगेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा टूरिज्म कांपलेक्स के अधिकारी मौजूद रहे।