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ओलावृष्टि के साथ बरसात व तेज हवाओं से मौसम कूल-कूल

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दो दिन से चल रही बूंदाबांदी, ओलावृष्टि और शीतलहर जिले में जनजीवन पर असर पड़ा है और सब्जी की फसलें प्रभावित हुई हैं, जबकि गेहूं की फसल को बहुत फायदा होगा। अधिकतम तापमान में 4.4 डिग्री सेल्सियस गिरावट आ गई। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 22.8 डिग्री से गिरकर 17.4 डिग्री सेल्सियस पर आ गया।
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शनिवार को मौसम साफ होने की उम्मीद है। उसके बाद न्यूनतम तापमान गिरेगा और कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ सकता है। सुबह, शाम और रात को धुंध छाए रहने का अनुमान है। जिले में वीरवार को पूरा दिन बादल छाए रहे और रुक-रुक कर हल्की बूंदाबांदी होती रही। वीरवार पूरी रात बारिश होती रही। शुक्रवार सुबह करीब चार बजे जिले के नीलोखेड़ी क्षेत्र के गोंदर और अन्य गांवों में ओलावृष्टि हुई। सुबह बादल छाए रहने के साथ छींटे पड़ीं। दोपहर दो बजे जिले में ओलावृष्टि होने से धरती पर सफेद चादर बिछ गई। झमाझम बारिश से शहर और देहात में कई जगह जलभराव हुआ। रास्तों में पानी भर गया।
10 किलोमीटर की गति से चली हवा
केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को अधिकतम तापमान 17.4 डिग्री और न्यूनतम 12.0 डिग्री सेल्सियस रहा। नमी 89 प्रतिशत और वाष्प दाब 10.9 एमएम रहा। हवा की गति 9.9 किलोमीटर प्रति घंटा रही। जिले में दोपहर तक 15.8 एमएम वर्षा हुई, जबकि उसके बाद भी अच्छी बरसात हुई है। कई इलाकों में करीब 30 एमएम बारिश हुई है। जबकि वीरवार को अधिकतम तापमान 21.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 13.0 डिग्री सेल्सियस, नमी 95 प्रतिशत, वायु की गति 1.5 किलोमीटर प्रति घंटा थी।
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जिले में टमाटर का रकबा करीब 3000 हेक्टेयर और लहसुन का रकबा करीब 900 हैक्टेयर है। यह दोनों फसलें ओलावृष्टि से प्रभावित हुई हैं। टमाटर की फसल को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से फल काले होकर सड़ जाएंगे। खेतों में जलभराव के कारण पौधों में फंगस लगेगी और पौधे नष्ट हो जाएंगे। टमाटर का ज्यादातर रकबा तरावड़ी और नीलोखेड़ी क्षेत्र में तथा लहसुन का क्षेत्र इंद्री खंड में ज्यादा है। आने वाले समय में टमाटर की किल्लत पैदा हो जाएगी। जिले में मटर का रकबा कम ही होता है। मटर को भी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से पालक की फसल पर भी असर पड़ा है। इससे पालक के पत्ते छिन्न हो जाते हैं। नीलोखेड़ी फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी के चेयरमैन डॉ. सरदार सिंह ने कहा कि तरावड़ी और नीलोखेड़ी क्षेत्र में ही टमाटर का करीब 800 हैक्टेयर रकबा रहता है। काफी नुकसान हुआ है।
गेहूं की फसल को जबरदस्त फायदा
कृषि विभाग के पूर्व तकनीकी अधिकारी डॉ. एसपी तोमर ने कहा कि गेहूं की समय से बिजाई वाली फसल पर बारिश से कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि बहुत फायदा होगा। सब्जी की फसलें संवेदनशील हैं, जिन पर ओलावृष्टि से असर पड़ता है। गेहूं पर बारिश का जबरदस्त फायदा होगा। यह बारिश गेहूं के लिए सोने सरीखी है। केवल पांच या सात प्रतिशत किसान जिन्होंने पांच से दस दिसंबर के बीच गेहूं बिजाई की है उनके खेतों में जलभराव का प्रभाव हो सकता है। गेहूं के जमाव में दिक्कत आएगी।
कृषि विभाग ने आंकलन सर्वे में लगाए अधिकारी
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. आदित्य डबास का कहना है कि स्टाफ को गेहूं और गन्ना इत्यादि फसलों के नुकसान के आंकलन के लिए कह दिया है। हालांकि इन फसलों को बारिश से नुकसान नहीं होता। अधिकारी किसानों से बात करेंगे और उनके नुकसान संबंधी आवेदन एकत्रित करेंगे। शुक्रवार को पूरा दिन बारिश जारी रहने की वजह से सर्वे पूरा नहीं किया जा सका। जो भी रिपोर्ट तैयार होगी शनिवार को मुख्यालय भेज दी जाएगी। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. मदनलाल का कहना है कि सब्जी की फसल को लेकर ओलावृष्टि और बारिश से हुए नुकसान को लेकर फिलहाल आंकलन नहीं किया गया। अभी कोई सर्वे नहीं किया गया है। किसानों ने भी अभी रिपोर्ट नहीं की।
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