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तीन दिन छाए रहेंगे बादल, बूंदाबांदी के आसार

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ठंड के जबरदस्त प्रकोप के साथ अब तीन दिन तक खराब मौसम का सामना करना पड़ सकता है। 24 से 26 दिसंबर तक बादलों भरा मौसम रहने और कहीं-कहीं पर बूंदाबांदी के आसार हैं। ठंड अभी और ज्यादा असर दिखाएगी। पूर्वानुमान है कि पांच दिन तक प्रतिदिन न्यूनतम तापमान में एक-एक डिग्री सेल्सियस गिरावट आएगी। 27 दिसंबर को धुंध छाने और उसके बाद दो दिन हल्के बादल दिखाई देंगे। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग चंडीगढ़ के अनुसार ठंड का असर कायम रहेगा। पिछले दस दिन में केवल एक दिन ही सूर्य के दर्शन हुए थे। सोमवार को भी बादलों की ओट में सूर्य दिखाई नहीं दिए। दोपहर बाद एक बार हल्की सी धूप दिखाई दी। दिन में भी अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है। रातें और ज्यादा ठंडी महसूस हो रहीं हैं। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को अधिकतम तापमान 11.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस रहा। आर्र्दता 100 प्रतिशत रही। वाष्प दाब 8.3 एमएम और वायु की औसतन गति 3.7 किलोमीटर प्रति घंटा रही।
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ट्रेनों की रफ्तार रही कम
धुंध के कारण कई ट्रेन निर्धारित समय से देरी से पहुंच रही हैं। सोमवार को भी चंडीगढ़ शताब्दी एक्सप्रेस नई दिल्ली-चंडीगढ़ गाड़ी की शाम 8.49 की बजाय 9.13 बजे करनाल पहुंच बताई गई। शान ए पंजाब एक्सप्रेस अमृतसर-नई दिल्ली रात 8.27 की बजाय 8.42 बजे पहुंची। हजूर साहिब नांदेड़-अमृतसर सचखंड एक्सप्रेस करीब दस घंटे लेट चल रही है। जम्मूतवी-अजमेर पूजा एसएफ एक्सप्रेस 15 मिनट लेट हुइ। जम्मूतवी लिंक एक्सप्रेस टाटानगर-जम्मूतवी रात्रि 12.13 बजे की बजाय पौने तीन घंटे देरी से बताई गई। जम्मूतवी एक्सप्रेस संबलपुर-जम्मू रात्रि 12.26 की बजाय चार घंटे पांच मिनट देरी से पहुंच बताई गई। जबकि कालका मेल हावड़ा-कालका गाड़ी पौने ग्यारह घंटे लेट चल रही है।
पाला पड़ने की संभावना हो तो बचाएं फसलें
पूर्व कृषि तकनीकी अधिकारी डॉ. एसपी तोमर ने कहा कि कई दिन से सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो रहे। इससे गेहूं की फसल में पीलापन पड़ने की संभावना बन जाती है। कई दिन लगातार ऐसा मौसम चलना फसल के लिए उचित नहीं होता। यदि पांच-सात दिन और यही हाल रहा तो फसल पर विपरीत असर की संभावना बनेगी। सब्जी की फसलों पर अधिक असर पड़ने की संभावना है। हालांकि अभी पाला नहीं पड़ा और यदि पाला पड़ा तो पत्तेदार सब्जियों पर असर होगा। बरसीम जैसी हरे चारे की फसल में किसानों को हल्की सिंचाई करनी चाहिए ताकि पशुचारे को बचाया जा सके। यदि पाला पड़ता है तो गेहूं में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। इससे रात को फसल पर जमने वाली पाले की परत से बचाव होगा।
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