प्रदेश सरकार के आदेश पर सरकारी एजेंसियों की मार्फत राइस मिलों को मिलिंग के लिए दिए गए धान के स्टॉक की जांच के लिए जिला स्तर पर विशेष टीमें गठित की जाएगी। इसके आदेश खाद्य एवं आपूर्ति विभाग हरियाणा के मुख्यालय से जारी किया गया है। टीम में कई विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। डीएफएससी मुख्यालय से अधिकारियों के नामों की सूची जारी हो चुकी है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के नेतृत्व में यह टीम सभी राइस मिलों में जाकर स्टॉक व पूरा रिकार्ड जांचेगी। जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस टीम पर निगरानी रखेंगे। इसके लिए डीसी की सहमति से अलग-अलग विभागों के अधिकारियों की टीमें गठित की जाएंगी। डीएफएससी की ओर से डीसी को इसके लिए पत्र भी लिखा जा चुका है। तीन दिन से राइस मिलों में पुलिस का पहरा लगाया हुआ है। मिलों के अंदर रखे धान के तमाम स्टॉक की रिकार्ड रजिस्टर के साथ जांच की जा रही है।
बता दें कि धान खरीद के दौरान फर्जी गेट पास और फर्जी एंट्री के आरोप लगे थे। इस मामले को लेकर अब सरकार की ओर से राइस मिलों के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई है, ताकि यूपी और बाहर से चावल लाकर मिलों में न रखा जा सके। इससे राइस मिलर्स में हड़कंच मचा हुआ है। व्यापारी इसका विरोध जता रहे हैं, जबकि प्रशासन सरकार के आदेशों की पालना में जुटा है। ये स्थिति पिछले पांच दिनों से चल रही है और टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।
कितना पीआर ग्रुप व कितना बासमती धान है यह किसी को नहीं पता
डीएफएससी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, करनाल जिले में तीन सरकारी एजेंसियों की मार्फत 16 लाख 22 हजार 154 मीट्रिक टन धान न्यूनतम निर्धारित मूल्य पर खरीदकर 316 राइस मिलों को मिलिंग के लिए दिया गया है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में धान के क्षेत्रफल के अनुमान के अनुसार करीब 5.80 लाख मीट्रिक टन धान उत्पादन होता है। मार्केटिंग बोर्ड के अनुसार जिले की अनाज मंडियों में सीजन में अब तक करीब 17 लाख 5270 एमटी धान की आवक हुई है। कृषि विभाग का अनुमान है कि पीआर ग्रुप व बासमती धान की रोपाई में 60:40 प्रतिशत क्षेत्रफल का अनुपात रहता है। इस बार किसानों ने बारीक किस्मों पर अधिक जोर दिया हुआ था। इससे अनुमान है कि इस अनुपात में भी अंतर आया होगा। सरकार केवल पीआर ग्रुप धान को ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदती है। यहां आशंका है कि बासमती धान के उत्पादन का आंकड़ा और कुल आवक में कितना अंतर है। इस घालमेल का पता नहीं चल पा रहा, जो धान एजेंसियों को दिया गया और कुल आवक के आंकड़े पर नजर डालें तो एक लाख एमटी के आसपास ही बासमती धान का अनुमान है।
सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं
बता दें कि जो भी राइस मिल सीएमआर का काम करते हैं, उनके लिए पिछले दो साल पहले एसीएस की ओर से निर्देश दिए गए थे कि उनको मिल के बाहर व अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाने जरूरी हैं, लेकिन मिलों द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है। आशंका है कि कुछ मिलर यूपी और बिहार से सस्ता चावल लाकर एफसीआई में जमा कराते हैं और प्रदेश सरकार से पीआर के निर्धारित रेट लेते हैं। इसके अलावा, फर्जी गेट पास और नमी के नाम पर किसानों को लूटा जाता है।
हम फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए तैयार : गोयल
हरियाणा राइस मिल एसो. के उप प्रधान विनोद गोयल का कहना है कि मिलों के बाहर पुलिस तैनात करना गलत है। मिलर्स फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए तैयार हैं, लेकिन मिलों के बाहर पुलिस खड़ी करके सरकार व्यापारियों को बदनाम करने का काम कर रही है। आगामी दो दिनों तक सीएमआर का कार्य बंद रखा जाएगा, अगर सरकार नहीं मानी तो आगामी निर्णय लिया जाएगा।