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फाइलों को निपटाते और रिकार्ड पूरा करते नजर आए पुलिस कर्मचारी

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गब्बर के नाम से मशहूर मंत्री अनिल विज को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद जैसा की सभी अंदाजा लगा रहे थे, ठीक वैसा ही हुआ। अनिल विज ने पानीपत सिटी थाना में छापा मारा और खामियां मिलने पर एक एसआई को सस्पेंड भी कर दिया। इसका असर करनाल जिले के थानों में पूरा असर दिखा। इस छापे के बाद से जिलेभर के थानों में साफ-सफाई कराई गई। इतना नहीं अन्य दिनों की अपेक्षा सभी कर्मचारी अपनी-अपनी अटकी फाइलों और सरकारी रिकार्ड को पूरा करते दिखे। पेंडिंग शिकायतों को रजिस्ट्रर में दर्ज किया गया और नहीं दर्ज की गई का जवाब भी तैयार किया गया। कोई भी पुलिस अधिकारी मंत्री अनिल विज से उलझने से बच रहा है। दिनभर पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अनिल विज की लोकेशन पता करते रहे।
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बता दें कि अनिल विज के पास पिछली सरकार में स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा था और वे अस्पतालों में लगातार छापेमारी करते रहे हैं और लापरवाही सामने आने के बाद से सीएमओ से लेकर संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही सस्पेंड करने में मशहूर रहे हैं। इसके अलावा, जहां भी कष्ट निवारण समिति के अध्यक्ष रहे, वहां पर अधिकारियों की खूब खिंचाई की थी। ऐसे में इस बार विज को स्वास्थ्य के साथ-साथ गृह विभाग मिलने के कारण पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों में भी हड़कंप की स्थिति है। सभी थाना प्रभारी विज के संभावित अचानक होने वाले निरीक्षण को लेकर पहले से ही अलर्ट हैं। जैसे ही वीरवार को उनको गृह विभाग की जिम्मेदारी दी गई तो तुरंत ही इसका थानों में असर दिखा। वीरवार को सभी थानों में कर्मचारी, मुंशी समेत अन्य पुलिस अधिकारी अपनी अपनी केस डायरी और लंबित केसों की लिस्ट बनाते नजर आए। सिविल लाइन थाना प्रभारी संजीव गौर और सिटी थाना प्रभारी हरजिंद्र सिंह अपने स्टाफ के साथ रिकार्ड देखते मिले, इसी प्रकार महिला थाना प्रभारी कविता ने भी स्टाफ के साथ बैठक करके केसों के बारे में अपडेट लिया। इसी प्रकार, कस्बों के अन्य थानों के भी यही हालात रहे।
टीम ने जाना थानों का हाल
विज के गृह मंत्री बनने को लेकर पुलिस कर्मचारियों में काफी हलचल मची हुई है। शहर के थानों के हालात जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने तीन थानों का दौरा किया जहां माहौल अलग सा दिखाई दिया। जब टीम सदर थाना में पहुंची तो वहां पुलिस कर्मचारी अपने कार्य में व्यस्त थे। कोई अपने पूरे केसों की फाइल देख रहा था तो कोई आरोपियों को कोर्ट में ले जाने की तैयारी कर रहा था। इसके बाद टीम जब महिला थाना पहुंची तो सफाई के कारण थाना परिसर चमक रहा था। महिलाओं के मामले में पंचायतें भी हो रही थीं। सभी पुलिस कर्मचारी एक्टिव नजर आ रहे थे। सिविल थाना के भी यही हालत थे। थाना के बाहर से लेकर अंदर तक सफाई की पूरी व्यवस्था थी। थाना प्रभारी एक मामले में पोस्टमार्टम हाउस गए हुए थे। अन्य पुलिस कर्मचारी अपने कार्यों में लगे हुए थे। कोई सफाई कर रहा था तो कोई अन्य कार्य कर रहा था। नाम न छापने पर एक पुलिस कर्मचारी ने बताया कि डाटा अपडेट किया जा रहा है, क्योंकि विज कभी भी किसी भी थाने में छापा मार सकते हैं।
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शुरू से ही तेज तर्रार नेता हैं विज
वर्ष 2014 की सरकार में अनिल विज को स्वास्थ्य विभाग का मंत्रालय मिला था। इसके बाद ही अनिल विज ने सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण करने शुरू कर दिए और अस्पताल की छत पर चढ़कर पानी की टंकी भी चेक की। लापरवाही मिलने पर उन्होंने कई डॉक्टरों को लताड़ लगाई। इसके बाद उन्हें जिला कष्ट निवारण समिति का चेयमैन भी बनाया गया। कैथल और पानीपत में उन्होंने जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में कई अधिकारियों को सस्पेंड करने के निर्देश दिए तो जमकर फटकार भी लगाई। इसी प्रकार नवंबर 2015 में फतेहाबाद की एसपी संगीता कालिया और अनिल विज के बीच शराब तस्करी को लेकर बहस हुई और नौबत यहां तक आ गई कि विज ने एसपी को बैठक से जाने के लिये गेट आउट तक बोल दिया था। यह मामला काफी चर्चा में रहा था।
जिले में हैं 17 थाने और 17 पुलिस चौकी
जिले में दो महिला थानों सहित 17 थाने हैं। इनमें हाइवे थाना भी शामिल है। शहर की बात करें तो शहर, सदर, सिविल, रामनगर, सेक्टर-32, 33 और हाईवे ये छह थाने हैं। इसी के साथ शहर में पुलिस चौकी भी 17 हैं। इसके साथ ही जिले में एसपी सहित करीब 1851 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात हैं। इनमें एक एसपी, एक एएसपी, 7 डीएसपी, 25 इंस्पेक्टर शामिल हैं।
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