दालों की महंगाई से परेशान जनता पर अब खाद्य तेलों के बढ़ते दाम का बोझ
पड़ गया है। इससे किचन का बजट बिगड़ रहा है। खुदरा व थोक में तेलों के दाम
में हुई वृद्धि से प्रदेश में तेलों के दाम करीब 15 से 20 रुपये प्रति लीटर
तक बढ़ गए हैं। इससे गृहिणियों के लिए अपने रसोई बजट में सामंजस्य स्थापित
करना मुश्किल हो गया है।
अब तक दालों के दाम में हुई वृद्धि से महंगाई की
मार झेल रहे उपभोक्ताओं पर तेलों के दाम बढ़ने से दोहरी मार पड़ी है। हालात
ये हो गए हैं कि दाल और तेलों के रेटों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। त्योहारी
सीजन की शुरुआत के साथ ही पिछले करीब एक माह में खाद्य तेलों के दाम में
15 से 20 रुपये तक प्रति लीटर इजाफा हुआ है। तेलों के दाम बढ़ने का कारण
त्यौहारी सीजन में तेलों की डिमांड में इजाफा होना बताया जा रहा है। वहीं
आम जनता इसे जमाखोरी के नजरिए से देख रही है।
प्याज व दालों के बाद अब
खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से लोगों के घरों की रसोई का बजट बिगड़ गया है।
गृहणियों को अपने रसोई बजट में सांमजस्य स्थापित करने में परेशानी हो रही
है। लेकिन सरकार ने अभी तक वस्तुओं के खुदरा दामों में हो रही वृद्धि पर
अंकुश लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं। हालांकि, व्यापारी दीपक कुमार व
सोहन लाल गर्ग ने बताया कि पिछले तीन माह में तेलों के दामों में उछाल आया
है। तेल की कोई कमी नहीं है और न ही स्टाक किया।
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खाद्य तेलों के दाम भी 15 से 20 रुपये प्रति लीटर बढ़े
दालों
के बाद अब खाद्य तेलों के दाम भी आसमान पर हैं। अगस्त से अक्टूबर तक सरसों
तेल के दाम 30 से 40 रुपये प्रति लीटर तक बढ़े हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र व
रिटेल में तो इसके दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। सरसों हीं नहीं अन्य खाद्य
तेलों के दामों भी पांच से 10 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि हुई है। उधर, होल
सेल में रेट प्रति पैकेट पांच से सात रुपये कम मिल रहे हैं।
नहीं बढ़ा सरसों का रकबा
जिले
में दो साल से सरसों का रकबा नहीं बढ़ा है। पिछले साल जिलेभर में एक हजार
हैक्टेयर में सरसों की खेती हुई। इस बार भी एक हजार हैक्टेयर का ही टारगेट
है। सरसों का इलाका नहीं बढ़ने के कारण भी तेलों के दाम में उछाल आ रहा है।
इस बारे में कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को चाहिए कि
वे सरसों का रकबा बढ़ाएं ताकि तेल का काम घर से ही चल जाए।
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खाद्य तेल मौजूदा रेट प्रति लीटर बढ़े दाम प्रति लीटर
सरसों तेल 120 रुपये 35 से 40 रुपये
रिफाइंड 80 रुपये पांच से 10 रुपये
डालडा घी 75 रुपये 15 रुपये
देसी घी 400 रुपये 80 रुपये
दाल से तो हाथ धोए अब तेल की बारी
दाल
के बाद अब तेलों के दाम भी 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं।
जिससे गृहिणियों के लिए रसोई बजट में सांमजस्य स्थापित करना पाना मुश्किल
हो गया है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
राज लांबा निवासी सेक्टर-13
सरकार
को जमाखोरी पर रोक लगानी चाहिए। जमाखोरी से ही खुदरा महंगाई में इजाफा हो
रहा है। लेकिन सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। जिससे आम जनता को
परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कुसुम अग्रवाल, निवासी सेक्टर सात।
खाद्य
पदार्थों के दाम बढ़ने से मध्य वर्गीय व गरीब परिवारों के लिए दो वक्त की
रोटी जुटाने के भी लाले पड़ गए हैं। पहले तो लोग कहते थे कि मेहनत मजदूरी
कर दाल रोटी का जुगाड़ कर लेंगे लेकिन अब तो उस कहावत से दाल शब्द ही गायब
हो गया है। लेकिन सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है।
सुषमा, निवासी माल रोड।
व्यापारी
व दुकानदार अधिक मुनाफे कमाने के चक्कर में जरूरी चीजों की जमाखोरी कर रहे
हैं। मार्केट में सामान की आपूर्ति कम होने व डिमांड बढ़ने से उसके दामों
में इजाफा हो जाता है। उपभोक्ताओं को मजबूरन चीजें खरीदनी पड़ती हैं। जिससे
दुकानदारों को लाभ पहुंचता है। लेकिन सरकार इस दिशा में कोई भी प्रयास
नहीं कर रही है।
शशि गुप्ता निवासी सेक्टर सात ।
अब
हरियाणा में भी यूपी की तर्ज पर दुकानों पर दाल व तेल के सैंपल दिखाई
देंगे। क्योंकि ये दोनों चीजें तो अब अमीरों की पहुंच तक ही सीमित हो रही
हैं। यदि समय रहते सरकार ने बढ़ते दामों पर रोक नहीं लगाई तो भविष्य में
इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
शकुंतला गुप्ता, निवासी चौड़ा बाजार।
पहले
हर रोज घर में एक समय दाल बनती थी। अब तो हफ्ते में दो दिन भी दाल नसीब
नहीं होती। अब तेलों के दाम बढ़ रहे हैं, लगता अब तक दो वक्त की रोटी से
सब्जी ही गायब हो जाएगी।
प्रियंका, निवासी चौड़ा बाजार।
अब
तो दाल व पनीर के दाम लगभग बराबर हो गए हैं। तो फिर दाल रोटी क्यों लोग
शाही पनीर का नाम लेकर प्रदेश की समृद्धि की कहानी बयान करेंगे। इससे सरकार
को भी जनता की समृद्धि का तर्क देने का एक मुद्दा मिल जाएगा।
किरण, निवासी सेक्टर-13