आज के दौर में जहां इंसान ही इंसान के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है। वहीं पशु पक्षियों पर अपना प्यार लुटाने वाली मीनाक्षी बेजुबानों के दर्द को अपना रही हैं।
अपना जीवन पशु-पक्षियों को समर्पित करने वाली मीनाक्षी की कहानी बहुत ही अनोखी है। मीनाक्षी ने बताया कि 13 साल पहले वह सेक्टर 13 की मार्केट से जा रही थी, तभी बहुत तेज बारिश आ गई। अचानक उनकी नजर बारिश में अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ भीग रही एक कुतिया पर पड़ी। उसने तुरंत गाड़ी रोककर बच्चों को उठाया और एक तरफ एक छोटा सा घर बनाकर उनको उसमें रख दिया। मीनाक्षी कहती हैं कि इसके बाद उन्हें बहुत सुखद एहसास हुआ। उस दिन के बाद उन्होंने ऐसा करने की कसम खा लिया कि इन बेजुबानों को भी वह अपने बच्चों की तरह प्यार देंगी। बस उसी दिन से उसे जहां भी कोई घायल पशु या पक्षी दिखाई देता है तो वह उसे अपने घर ले आती और उसका उपचार करती है।
आवाज सुनते ही सब हो जाते हैं इकट्ठा
मीनाक्षी ने बताया कि वह सभी कुत्तों को रजाई और पराली में रखती है। हर सप्ताह इनके सभी कपड़ों को धोया जाता है। छत पर कबूतरों के लिए घर बनाया हुआ है। वहीं पार्क में गाय और अन्य पशुओं के घास खाने और पानी पीने के लिए विशेष इंतजाम हैं। परिजनों ने बताया कि मीनाक्षी की आवाज सुनकर सभी जीव एक ही जगह आ जाते हैं।
कुत्तों के बर्थ पर किया कंट्रोल
मीनाक्षी पशु और पक्षी प्रेमी होने के साथ-साथ कुत्तों के बर्थ पर भी कंट्रोल कर रही है।
पूरे मोहल्ले की सुरक्षा कालू की जिम्मेदारी
सेक्टर 12 के पार्ट टू में पूरे मोहल्ले की सुरक्षा की जिम्मेवारी कालू की है। यह कालू कोई चौकीदार नहीं बल्कि मीनाक्षी द्वारा पाला गया एक कुत्ता है।
मौत के बाद पशु और पक्षियों को दफनाती हैं मीनाक्षी
किसी भी पशु या पक्षी की मौत हो जाती है तो वह उसे विधिवत रूप से गड्डा खोदकर नमक और कपड़ा डालकर दफना देती है। उसका कहना है कि उनका जीवन भी मानव के समान है। इसलिए उन्हे भी हमें इसी तरह प्यार देना चाहिए। जैसे की अपने बच्चों को देते हैं।