करनाल। अरे.. भाई बचकर, ये मोदी नहीं छोड़ेगा... ये.. ये.. लगा खींचा और वो गया.. पतंग। देख-देख पीछे केजरीवाल भी आ रहा है। भई वाह.. राहुल गांधी के साथ टक्कर..। लंबी चलेगी ध्यान रखना इनका। ये शोर दिल्ली के चुनावी माहौल में तो हैं ही, लेकिन वीरवार को बसंत पंचमी के मौके पर करनाल की पतंगबाजी में भी सुनाई और दिखाई पड़ा। मजे का दृश्य तब था, जब आसमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राहुल गांधी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं की फोटो वाले पतंग हवा में उड़ रहे थे। चुनावी टक्कर की तरह आसमान में भी इनके लंबे पेंच लड़े। जीता वहीं जिसकी पकड़ मजबूत थी, दिनभर चले खेल मेें कभी मोदी आगे तो कभी केजरीवाल। कभी-कभी मांझे का खींचा लगाते हुए राहुल गांधी की फोटो वाले पतंग ने भी आसमान में सभी का सफाया किया। बस यही खेल सुबह सूरज की पहली किरण के साथ सूर्यास्त तक हुई पतंगबाजी में चलता रहा। वहीं पतंगबाजी के साथ छतों पर लगे डीजे पर बजने वाले हरियाणवी, पंजाबी गीतों पर भी युवाओं ने खूब मस्ती की।
पतंग कटने पर गानों की मस्ती और लाइव कमेंट्री का मजा
सुबह पतंगबाजी के लिए बुधवार रात से ही युवाओं ने अपने म्यूजिक सिस्टम और डीजे छतों पर लगा दिए थे। गानों पर नाचते हुए तो पतंगबाजी का आनंद लिया ही। लेकिन मजेदार दृश्य तब रहा, जब बढ़े हुए पेंच में दूसरे की पतंग कटती थी। आई बो आई बो, ओ गुड्डी तेरी आई बो.. व गजबन पानी नै चाली.. जैसे फेमस गीतों और कमेंट्री में चुटकुलों से दिए जवाब का पड़ोसियों ने भी आनंद लिया।
वरिष्ठ लोगों ने समझाया.. बढ़े पेंच में खींचमार नहीं चलती
बसंत पंचमी के दिन लगभग शहर के हर क्षेत्र में लोग पतंगें उड़ाते दिखाई दिए। इनमें युवाओं के अलावा वरिष्ठ लोगों ने भी पतंगबाजी का हुनर दिखाया। इनकी पतंगबाजी की खास बात यह है कि लंबे पेंच कई किलोमीटर तक जाते हैं। अगर बीच में कोई खींचमार आए तो उसे हाथ से पतंग काटकर समझा दिया जाता है कि लंबे पेंच में खलल ना डाले। इससे छोटे पेंच वाले भी बड़ी पतंग वाले से पंगा लेने की बजाय लंबे पेंच का आनंद लेते है।
नवाबों के जमाने से चली आ रही है पतंगबाजी
कर्ण नगरी में बसंत पंचमी पर पतंगबाजी का ट्रेंड नवाबों के जमाने से चला आ रही है। एडवोकेट राजकुमार और पुराना शहर निवासी राजेश शर्मा का कहना है कि आज भी पतंगबाजी का क्रेज कम नहीं हुआ। वर्ष भर युवा इस त्योहार का बेसब्री से इंतजार करते हैं और सर्दी की शुरूआत से ही पतंगबाजी का दौर शुरू हो जाता है। लेकिन बसंत पंचमी के दिन युवाओं में पतंगबाजी का जोश अपने उफान पर ही होता है।