एज वेरिफिकेशन कराने पहुंचे विद्यार्थी
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राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों की उम्र को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एज वेरिफिकेशन जरूरी है लेकिन जिला नागरिक अस्पताल के सीमित संसाधनों पर एक साथ 500 खिलाड़ियों की उम्र जांच का बोझ डाल दिया गया है। अस्पताल में एज वेरिफिकेशन के लिए रोजाना करीब पांच केस की क्षमता है, जबकि विभाग की ओर से एक साथ करीब 500 खिलाड़ियों के सत्यापन के लिए मामले भेज दिए गए हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अस्पताल में एक ही रेडियोलॉजिस्ट तैनात है और वह पीएमओ का अतिरिक्त दायित्व भी संभाल रही हैं।
ऐसे में खिलाड़ियों की उम्र जांच का अतिरिक्त काम बढ़ने से जिला नागरिक अस्पताल में आने वाले सामान्य मरीजों की रेडियोलॉजी जांच प्रभावित होने की आशंका है। अस्पताल पहले से ही रोजाना बड़ी संख्या में मरीजों का दबाव झेल रहा है। अब खिलाड़ियों के एज वेरिफिकेशन की बड़ी संख्या में जांच होने से नियमित मरीजों की जांच के लिए इंतजार का समय बढ़ सकता है।
खिलाड़ियों की वास्तविक उम्र सुनिश्चित करने के लिए एज वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। एज वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ही खिलाड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेंगे। जिला शिक्षा विभाग के एईओ सुलेंद सिंह ने बताया कि एज वेरिफिकेशन के संबंध में निदेशक की ओर से पत्र मिला था। इसके बाद खिलाड़ियों के एज वेरिफिकेशन के लिए मामले जिला नागरिक अस्पताल भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि सत्यापन के बाद ही खिलाड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे।
अधिकारी के अनुसार
पीएमओ और रेडियोलॉजिस्ट सरिता विश्नोई ने बताया कि एज वेरिफिकेशन का काम करने के लिए उपलब्ध संसाधनों की क्षमता सीमित है। एक दिन में करीब पांच मामलों का सत्यापन किया जा सकता है। इस हिसाब से 500 मामलों को पूरा करने में करीब 100 कार्यदिवस लग सकते हैं, यदि रोजाना केवल यही काम किया जाए।
रेडियोलॉजी विभाग में सामान्य मरीजों की एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और अन्य जरूरी जांच भी होती हैं। गंभीर मरीजों और इमरजेंसी मामलों में जांच की समयबद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अतिरिक्त वेरिफिकेशन कार्य का असर नियमित सेवाओं पर नहीं पड़े, इसके लिए अलग व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है।