फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: मेंटर की लापरवाही से रैंकिंग में चार कदम पिछड़ा करनाल

विज्ञापन
विज्ञापन
एफएलएन कार्यक्रम के तहत जिम्मेदारों ने नहीं किया स्कूलों का निरीक्षण, आठवें से 11वें पायदान पर आया जिला
विज्ञापन

20 प्रतिशत मेंटरों की लापरवाही के कारण 80 प्रतिशत की रिपोर्ट भी नहीं हो पाई मजबूत



माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। निपुण हरियाणा मिशन के तहत चल रही एफएलएन गतिविधियों से प्रदेश सरकार सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को मजबूत और स्कूल के माहौल को पढ़ाई के अनुकूल बनाने का प्रयास कर रही है। लेकिन इसे सिरे चढ़ाने और निगरानी रखने वाले मेंटरों की लापरवाही के कारण करनाल रैंकिंग से पिछड़ता जा रहा है।
अप्रैल में कुछ मेंटर ने काम में लापरवाही बरती तो अब रैंकिंग पिछली बार से चार पायदान कम आई है। इससे जिले की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। इस रिपोर्ट पर जिला शिक्षा अधिकारी भी सख्त हुए हैं और उन्होंने लापरवाही बरतने वालों को फटकार लगाई है।
विज्ञापन


वीरवार को निपुण हरियाणा मिशन की जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल चौधरी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद वत्स ने बैठक बुलाई। खंड शिक्षा अधिकारी नीलोखेड़ी के कार्यालय में हुई बैठक में उन्होंने सभी मेंटरों को सख्ती से निर्देश दिए कि वे स्कूलों की जांच और विभाग की योजनाओं के तहत पूरा कार्य करें। इसमें एक मेंटर की लापरवाही अन्य सभी के कार्यों को प्रभावित करती है। जिससे जिले का प्रदेश में प्रदर्शन खराब होता है। मार्च माह की रैंकिंग में जिला प्रदेश में आठवें पायदान पर था। जबकि अप्रैल माह में सही ढंग से स्कूल विजिट व अन्य कार्यों की रिपोर्ट न जमा होने से जिले को 11वीं रैंकिंग मिली है। बैठक में सभी खंड शिक्षा अधिकारी, सभी बीआरसी, समग्र शिक्षा के एपीसी, एफएलएन समन्वयक विपिन शर्मा, एफयूएन समन्वयक सुनील और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



टॉप-5 में लाने का दिया लक्ष्य

बैठक में मिली रिपोर्ट में सामने आया कि पूरे जिले में सभी बीआरसी और एबीआरसी को मिलाकर 106 मेंटर कार्य करते हैं। अप्रैल माह में इनमें से 80 प्रतिशत ने तो अपना पूरा कार्य किया, जबकि 20 प्रतिशत ने लापरवाही बरती। इससे पूरे जिले की रिपोर्ट कमजोर होने के कारण करनाल रैंकिंग में पिछड़ गया। विभाग की ओर से एफएलएन की गतिविधियों के आधार पर हर माह रिपोर्ट जारी की जाती है। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने मई माह में टॉप-5 रैंक लाने का लक्ष्य दिया है।
विज्ञापन




विजिट के दौरान कई बिंदुओं पर होती है जांच

एफएलएन के जिला समन्वयक विपिन शर्मा ने बताया कि एफएलएन गतिविधि के तहत जब कोई मेंटर स्कूल या क्लास विजिट करता है तो इस दौरान निदेशालय की ओर से जारी फार्म के अनुसार जानकारी जुटाता है। इनमें कई बिंदुओं पर बारीकी से जांच की जाती है। देखा जाता है कि स्कूल की स्किल पासबुक भरी है या नहीं। कक्षा कक्ष की दीवारों पर पाठ्यक्रम आधारित पेंटिंग, चार्ट आदि लगे हैं या नहीं। इस बिंदु के तहत कक्षा कक्ष पढ़ाई के लिए आकर्षक है या नहीं, इस बारे में जांच की जाती है।



ये दिए निर्देश

- स्किल पासबुक को दक्षता अनुसार 100 प्रतिशत भरना होगा, सभी स्कूलों में विद्यार्थियों का साप्ताहिक आकलन होगा

- सभी कक्षाओं में प्रिंट रिच वातावरण बनाना होगा। इसके तहत स्कूल, क्लस्टर और खंड स्तर पर प्रतियोगिता होगी। - मेंटर कक्षा विजिट शत-प्रतिशत होगी।

- सप्ताह के अंत में क्लस्टर लेवल पर समीक्षा बैठक होगी, कक्षाओं में अकादमिक योजना के अनुसार कार्य होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें