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तीन प्रकार की खाद से एक एकड़ में जगतराम उगा रहे 156 फसल

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शहर से 12 किलोमीटर दूर गांव नसीरपुर। यहां के प्रगतिशील किसान जगतराम ने एक एकड़ जमीन में 156 प्रकार की जैविक फसलें उगाईं हैं। हरी खाद, गोबर, गोमूत्र खाद और फसल अवशेष इन तीन प्रकार की खाद को यह किसान अपने खेतों में इस्तेमाल करता है। उनका कहना है कि खेती मेहनत और समझ का काम है हर किसान को समझ के साथ कड़ी मेहनत करनी चाहिए। यही नहीं उनका दावा है कि वह हर महीने प्रति एकड़ से 50 हजार रुपये की आमदनी अर्जित करते हैं। जगतराम ने रघुकुल किसान क्लब के नाम से अपना एक क्लब भी तैयार किया है, जिसमें उनके साथ 5 से 6 हजार किसान जुड़े हुए हैं और सभी प्राकृतिक तरीके से खेती करते हैं। खेतों की बेड पर हर रोज झाड़ू लगाई जाती है, यही नहीं दूर से देखने पर खेत रंगोली की तरह प्रतीत होते हैं। खेतों में अनेक प्रकार के फल, सब्जियां, दालें, तिलहन, औषधि उगाते हैं और प्रोसेसिंग करने के बाद मार्केट में खुद बेचते हैं, रेट भी खुद निर्धारित किए हैं। जगतराम हर शनिवार और रविवार किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक भी करते हैं।
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घर के सदस्य बीमार रहने लगे तो छोड़ा रासायनिक खाद
जगतराम ने बताया कि वह शुरू से ही खेती करते हैं, लेकिन उन्होंने ऑर्गेनिक खेती 2009 से शुरू की। उन्होंने बताया कि उस समय उनके परिवार पर बहुत सारी मजबूरी आन पड़ी। घर से कोई न कोई बीमार रहने लगा, घर की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ने लगी। फिर एक दिन उन्होंने राजीव दीक्षित का ऑडियो सुना और बिना रासायनिक खाद के खेती करने का निर्णय लिया। इस काम में उनकी पत्नी मीना ने भी साथ दिया और आज वह हर कदम पर जगतराम के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ी है। यह काम उन्होंने मजबूरी में शुरू किया, लेकिन आज इसी काम ही वजह से उनकी पहचान है।
यू हीं रोता है किसान
उन्होंने कहा कि किसान यू ही रोता है कि खेतीबाड़ी में कुछ नहीं होता, जबकि खेती अगर समझ और मेहनत के साथ की जाए तो उसके आगे कुछ भी अच्छा नहीं लगता। उन्होंने कहा कि किसान हर चीज अपने खेत में उगा सकता है, खुद रेट निर्धारित करता और खुद प्रोसेस भी कर सकता है। उनका कहना है कि किसान को किसी के कर्ज तले दबने की जरूरत नहीं है बस सही परख रखने की है। किसान घर में देसी गाय रखे, जिसके गोबर व मूत्र से सभी प्रकार की खाद और दवाइयां बनाई जाती हैं।
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तीन प्रकार की खुद बनाते हैं खाद
जगतराम ने बताया कि वह अपने खेतों में तीन प्रकार की खाद का इस्तेमाल करते हैं। खाद के लिये वह देसी गाय का मलमूत्र, हरी खाद जिसमें मक्की, ज्वार, बाजरा, मूंग, ढांचा, लोबिया, मूंगफली आदि का थोड़ी-थोड़ी मात्रा में इस्तेमाल करते हैं। यहीं नहीं तीसरी खाद के रूप में वह फसल अवशेषों का प्रयोग करते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने आज तक फसल अवेषशों को व्यर्थ नहीं जाने दिया, क्योंकि ये ही किसानों के सच्चे मित्र हैं।
क्लब के सदस्य 10 जुलाई से पहले नहीं लगते जीरी
उन्होंने बताया कि उनके क्लब में जितने भी किसान हैं, उनके से कोई भी 10 जुलाई से पहले जीरी नहीं लगाता। खेतों में रसायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया जाता खेत में जो भी खरपतार पैदा होता है उसका खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। जीरी में 30 दिन पानी रखते हैं और भी अन्य किसानों के मुकाबले दो क्विंटल तक ज्यादा उत्पादन मिलता है।
इन चीजों की करते हैं खेती
फल : सेब, बबूघोष, नासपत्ती, अंजीर, तीन प्रकार के अनार, खिरनी, चीकू, लीची, केला, आड़ूू, खुरमानी, अमरूद, इलाहाबादी अमरूद, ऐप्पल अमरूद, काला अमरूद, एल-49 लखनऊ अमरूद, नींबू, खुबकार, पपीता, कागजी व 12 मासी मोसमी, फालसा, सेतूत, किन्नू, माल्टा, कड़वा सहजन और मीठा सहजन, आम, आम्रपाली आम, लंगड़ा आम, मलिका आम, दशहरी आम, 12 मासी आम, जामुन, बेलपत्र आदि।
औषधी : दरड़, आंवला, बहेड़ा, सीमबल, चकोत्रा, सतावरी, एलोविरा, हल्दी आदि।
सब्जी : गाजर, मूली, सलजम, गोभी, बंद गोभी, गांठ गोभी, बरोकली, लेटूस, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, बैंगन, बैंगनी, लाल गाजर, काली गाजर, पीली गाजर, चुकंदर, प्याज, पालक, लहसुन, लौकी, मेथी, आलू, तोरी, करेला, भिंडी, खीरा, ककोड़ा, कठहल आदि।
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दालें : लोबिया, चना, काला चना, ग्रीन चना, सरसों, तिल, मूंगफली, उड़द, मूंग आदि।
इन सभी चीजों के साथ ही जगतराम के खेत में अनेक प्रकार के पेड़ और बाकी खेतों में देसी गेहूं देखी जा सकती है।
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