अंतरिक्ष परी डॉ. कल्पना चावला के नाम पर बनाया गया नाटक सितारों के पास कल्पना चावला से देशभर के लोग, युवा और छात्र बहुत कुछ सीखने के साथ प्रेरित होंगे।
विश्व के मानचित्र पर भारत के नाम की छाप छोड़ने वाली करनाल की बेटी कल्पना चावला के नाम पर बॉलीवुड की हस्ती सुषमा सेठ ने नाटक बनाया है। इस नाटक की लेखक भी स्वयं सुषमा सेठ है। खास बात यह है कि इस नाटक का पहला मंचन कल्पना चावला की जन्मस्थली राजा कर्ण की धरती करनाल पर होगा।
इसके बाद नवंबर महीने में हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ और बाद में देश की राजधानी दिल्ली में किया जाएगा। इसके बाद पूरे देश के सैकड़ों शहरों में नाटक का मंचन किया जाना है। मंचन के लिए फिल्मी हस्ती सुषमा सेठ, सामाजिक संस्था अर्पणा, निफा और दिल्ली के स्लम एरिया में रहने वाले 40 कलाकार बच्चों समेत संयुक्त तौर पर अपनी खास भूमिका अदा करेंगे।
इस संबंध में शुक्रवार को सामाजिक संस्था अर्पणा ट्रस्ट की ट्रस्टी अरुणा दयाल, विजय दयाल, फाइनेंस कंट्रोलर संदीप अरोड़ा व सामाजिक सरोकार के मुद्दों पर तीन पर विश्व रिकॉर्ड बनाने का गौरव प्राप्त सामाजिक संस्था निफा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू संयुक्त तौर करनाल क्लब में पत्रकारों से रूबरू थे।
इन लोगों ने संयुक्त तौर पर कहा कि कल्पना चावला की अंतिम उड़ान भी विश्व कल्याण के लिए थी लेकिन नीति को यह मंजूर नहीं था। कल्पना चावला की महानता, उनकी कुर्बानी और ज्ञान के नाम का विश्व भर में डंका बजता है। चूंकि कल्पना चावला का जन्म स्थल करनाल है और करनाल में ही अर्पणा ट्रस्ट भी समाज कल्याण को काम कर रहा है।
अर्पणा ट्रस्ट के सामाजिक सरोकार और भले के कार्य के लिए फिल्मी हस्ती सुषमा सेठ भी सहयोग करती रही है। इस कार्य के लिए भी सकारात्मक सोच की धनी सुषमा सेठ ने नाटक की कहानी स्वयं लिखी। नाटक की निर्देशक भी सुषमा सेठ है।
सुषमा सेठ ने देश के लोगों के सामने ऐसी मिसाल पेश करने का काम किया है, जो आम व्यक्ति संभवता: नहीं सोच पाएगा। सुषमा सेठ ने सामाजिक संस्था अर्पणा की ओर से दिल्ली के सरिता विहार के निकट मोलरबंद स्लम एरिया के 1400 गोद लिए बच्चों में से 40 बच्चों को चुना। इन 1400 बच्चों को अर्पणा शिक्षा और व्यवसाय दिलाने के प्रयास में जुटी है।
सुषमा सेठ ने इन 40 बच्चों को नाटक में रोल देकर देश भर में नई और खास पहचान दिलाने का काम किया है। इतना ही नहीं इन बच्चों की भूमिका के जरिए देश भर के लोग, युवा और छात्र कल्पना चावला के जन्म से लेकर स्कूली शिक्षा, कॉलेज, इंजीनियरिंग समेत विज्ञान की दुनिया से लेकर अंतरिक्ष में पहुंचने तक की पूरी कहानी मंच से नाटक के जरिए प्रस्तुत की जाएगी।
मतलब सुषमा सेठ ने दिल्ली की झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाले इन बच्चों को अब देश के लोगों को कल्पना चावला का पूरा इतिहास बताने के काबिल बना दिया है। नाटक का मंचन पहले दिन करनाल के सेंट थेरेसा कान्वेंट स्कूल के सभागार में 27 अक्तूबर की शाम को ठीक छह बजे होगा। शहर के लोगों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है।
इस कार्यक्रम में शहर का कोई भी व्यक्ति बिना किसी उम्र सीमा पाबंदी के पहुंच सकता है। इस दिन समारोह में उपायुक्त विकास यादव मुख्य अतिथि होंगे। अगले दिन 28 अक्तूबर को इस कार्यक्रम में जिला भर के सरकारी और गैर सरकारी बीस स्कूलों के 2510 विद्यार्थियों को कल्पना चावला के जीवन से प्रेरणा लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। यहीं से कल्पना चावला के नाटक के जरिए यह चालीस कलाकार लोगों को प्रेरित करने के काम प्रारंभ करेंगे। नाटक के जरिए प्रयास करने में कोई कमी बाकी नहीं छोड़नी चाहिए की सीख भी प्रमुख रहेगी।
निफा क रेगी सुषमा सेठ को कलाकार रत्न से सम्मानित
अंतरिक्ष परी कल्पना चावला का नाम ही करनाल के लोगोें के लिए गौरव की बात है। कल्पना चावला के संदर्भ और उनके जीवन परिचय से कुछ सीख मिलती हो, कोई भले का काम होता हो तो आम लोगों को भी सहयोग से पीछे नहीं हटना चाहिए।
सामाजिक संस्थाएं अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के उस वर्ग के लिए काम करती है, जिसकी बेहद आवश्यकता महसूस की जा रही है। निफा भी करनाल के लोगों की ओर से नाटक की निर्देशक सुषमा सेठ को कलाकार रत्न से सम्मानित करेंगी। नाटक पर अर्पणा ट्रस्ट, सुषमा सेठ और बाल कलाकारों की भूमिका विशेष है।
प्रीतपाल सिंह पन्नू, राष्ट्रीय अध्यक्ष, निफा