करनाल। काल भैरव जयंती बुधवार 12 नवंबर को मनाई जाएगी। श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि मार्गशीर्ष मास की कृष्ण अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर की रात 11:08 बजे पर होगी। समापन 12 नवंबर की रात 10:58 बजे होगा।
शास्त्री के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त रात 12:10 बजे से 1:50 बजे तक रहेगा। कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव के प्रतीकात्मक एवं चमत्कारी स्वरूप महाकाल भैरव की पूजा, जप और संकीर्तन का विशेष महत्व बताया गया है। इस अवसर पर ‘श्री महाकाल भैरव अष्टकम’ का पाठ कर भगवान भैरव की आराधना करनी चाहिए।
जयंती के दिन बाबा भैरवनाथ के मंदिर में जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाने और जलेबी का भोग लगाने की परंपरा है। इस दिन काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलाने की भी मान्यता है। स्नान के बाद पूजा-पाठ कर रुद्राक्ष की माला से ‘ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः’ मंत्र की पांच माला जप करनी चाहिए। संवाद