करनाल। पहली जुलाई 2017 को लागू हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को 27 माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक व्यापारी अपनी पहली वार्षिक रिटर्न (2017-18) ही नहीं दाखिल कर पाए। कारण, फार्म में कठिनाई है और कई कारोबारियों का सेल-परचेज का रिकार्ड भी मिस मैच है। ऐसे में व्यापारियों के साथ-साथ रिटर्न दाखिल करने में टैक्स विशेषज्ञों को भी पसीने छूट रहे हैं। यही कारण है कि सरकार की ओर से रिटर्न भरने की अंतिम तिथि भी 30 नवंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई है, लेकिन इस हालात में 31 दिसंबर तक सभी व्यापारियों का वार्षिक रिटर्न दाखिल होना मुश्किल नजर आ रहा है।
वर्ष 2018-19 रिटर्न की अंतिम तिथि 31 मार्च 2020
सरकार की ओर से सालाना रिटर्न जीएसटीआर-9 भरने की अंतिम तारीख पांचवीं बार बढ़ाई गई है। पहले यह 30 नवंबर थी, जिसे 31 दिसंबर कर दिया गया है। वहीं वित्तीय साल 2018-19 के लिए यह रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2020 हो गई है।
20 से 25 फीसदी कारोबारी ही भर पाए रिटर्न
सालाना रिटर्न फार्म की कठिनाई के चलते कारोबारियों के लिए यह रिटर्न भरना ही संभव नहीं हो पा रहा है। करनाल जिले में 20 से 25 फीसदी कारोबारी अभी तक यह रिटर्न भर सके हैं। जीएसटी काउंसिल ने इस फार्म की समस्या को देखते हुए यह भी राहत दी है कि दो करोड़ और इससे कम के सालाना कारोबार वाले चाहें तो यह रिटर्न भरें या नहीं भरें, इसके बाद भी अन्य कारोबारी यह रिटर्न भरने से बच रहे हैं। करनाल में 14 हजार से ज्यादा व्यापारी जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं।
समाधान का न ही प्रोफेशनल को पता था न ही डीलर को
कर सलाहकार एडवोकेट संजय मदान ने बताया जीएसटी काउंसिल ने इन फॉर्म को सरल करने का फैसला लिया था, लेकिन डेढ़ माह बाद भी यह अभी पोर्टल पर नहीं आए हैं, इसलिए यह तारीख बढ़ी है। उन्होंने बताया कि फार्म भरने में दिक्कत आ रही है। यदि किसी ने सेल की है तो उसका नेट लेजर नहीं आ रहा। ऐसे में उसे इनपुट का लाभ नहीं मिल रहा। रिटर्न गलत भरने से भी दिक्कत आ रही है। रि-कंसाइल नहीं हो पा रही। इसका न ही प्रोफेशनल को पता था न ही डीलर को।