जेबीटी भर्ती मामले में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद गुहला के 11 घरों में मायूसी छा गई है। चौटाला सरकार के दौरान हुई विवादित जेबीटी भर्ती में गुहला शिक्षा खंड से 11 लोगों की भर्ती हुई थी। हाईकोर्ट द्वारा हटाए गए अध्यापकों में गुहला के सभी 11 अध्यापक शामिल हैं।
इन अध्यापकों में से एक की पिछले दिनों सड़क हादसे में मौत हो गई थी। बाकी 10 गुहला के विभिन्न प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत हैं। जब गुहला के इन अध्यापकों से संपर्क किया गया तो सभी के चेहरों पर चिंता की लकीरें थीं। हालांकि सभी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कहकर अपना मन समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन फिक्र भी जता रहे थे कि अब तो ओवरएज हो चुके हैं, कहां जाएंगे। 13 साल हो गए पढ़ाते-पढ़ाते। कोई नया कारोबार शुरू करने की उम्र भी अब नहीं रही।
कर्ज लेकर घर बनाया, भरेंगे कैसे
हटाए गए लगभग सभी अध्यापकों ने बैंकों से कर्ज लेकर घर बनाए हुए हैं। अब कर्ज को भरने की चिंता खड़ी हो गई है। अध्यापक बताते हैं कि कर्ज भी बड़े भारी हैं। सुप्रीम कोर्ट में बात बन गई तो ठीक, वरना भगवान ही रखवाला है।
नौकरी देखकर हुई थीं शादियां
अदालत का फैसला अपनी जगह है लेकिन उन लोगों का क्या जिन्होंने अपनी बेटियों की शादियां इन अध्यापकों से इनकी नौकरियां देखकर की थी। हटाए गए अध्यापकों में से ज्यादातर बहुत गरीब परिवारों से आते हैं। सारे के सारे परिवार इन्हीं की तनख्वाह से रोटी खाते हैं। सवाल बड़ा है कि अब आगे क्या होगा। हटाए गए जेबीटी शिक्षकों में से एक ऐसे अध्यापक का नाम भी है जिसकी पिछले दिनों गुहला रोड पर हादसे में मौत हो गई थी। जब सारी भर्ती ही अवैध घोषित हो गई है, तो कर्मचारी के परिवार को मिलने वाली सरकारी राहत मिलेगी भी या नहीं, इस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।