आरक्षण की मांग को लेकर एक बार फिर से जाट नेताओं ने चुनावी दांव खेला। इन नेताओं ने चेतावनी भरे लहजे में सरकार से कहा कि यदि केंद्र की नौकरियों में जाटों के आरक्षण के लिए 20 फरवरी तक पॉलिसी नहीं बनाई गई तो वे केंद्र सरकार के विरोध में उतरेंगे।
जाट चुनाव में उसी पार्टी का समर्थन करेंगे जो उनकी मांग उठाएंगी। इसके अलावा गांव में उन नेताओं को घुसने भी नहीं दिया जाएगा जो आरक्षण की मांग पर उनके साथ नहीं हैं। जाटों के द्वारा इस चुनावी दांव के साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वे 23 फरवरी से दिल्ली को जाने वाले हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के रेल मार्ग को जाम कर दिल्ली को सील कर देंगे।
अखिल भारतीय सर्व खाप पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष नफे सिंह नैन तथा जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल छौत ने जाट धर्मशाला में प्रदेश स्तर की बैठक के बाद यह घोषणा की।
नफे सिंह नैन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदेश भर से आए अनेक जाट प्रतिनिधियों और खापों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान दोनों नेताओं ने कहा कि जाट आरक्षण संघर्ष समिति 10 फरवरी को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से मिलकर आरक्षण के संबंध में अपना पक्ष रखेगी।
आयोग के समक्ष पक्ष रखने के लिए सभी से परामर्श करके ज्ञापन तैयार किया गया है। जाट नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण देने के मामले में टालमटोल कर रही है।
इस बार जाट आरक्षण संघर्ष समिति आरपार की लड़ाई लड़ेगी और आरक्षण की मांग पूरी करवा कर रहेगी। उन्होंने कहा कि जाट सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं। इसलिए केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण की मांग की जा रही है।
दोनों नेताओं ने कहा कि चुनाव में जाटों की आरक्षण की मांग का समर्थन न करने वाले राजनैतिक दल के प्रत्याशियों व कार्यकर्ताओं को किसी भी गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। जाट एकजुट होकर उस राजनैतिक दल को ही वोट देंगे जो जाटों की मांग को पूरा करने का आश्वासन देगा।
बैठक में रण सिंह देशवाल ने भी कहा कि जाट समुदाय के सब्र का प्याला भर चुका है। केंद्र सरकार आरक्षण की मांग को शीघ्र पूरा करे। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम द्वारा खापों के संबंध में दिए गए बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इन लोगों को खापों के इतिहास का कोई ज्ञान नहीं है।