करनाल। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के तहत आंतरिक समिति का गठन अनिवार्य रूप से किया जाए। प्रत्येक स्कूल को समिति के सदस्यों का विवरण निर्धारित गूगल फॉर्म व शी-बॉक्स पोर्टल पर शीघ्र अपलोड करना होगा।
समिति के सदस्यों के नाम, पद और संपर्क विवरण स्कूल के सूचना पट्ट, वेबसाइट एवं अन्य प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करना भी आवश्यक होगा, ताकि कोई भी शिकायतकर्ता आसानी से संपर्क कर सके। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 मई 2026 से पूर्व सभी शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों के लिए जागरूकता व संवेदनशीलता सत्र आयोजित करना अनिवार्य होगा। इन सत्रों की अनुपालना रिपोर्ट छायाचित्रों सहित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय व जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय को भेजनी होगी।
- लापरवाही पर होगी कार्रवाई
यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित संस्थान के विरुद्ध अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रत्येक वर्ष 31 जनवरी से पूर्व वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करना भी अनिवार्य किया गया है।
- ये होता है पॉश अधिनियम
पॉश अधिनियम, 2013 का मतलब कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम है। यह कानून कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करता है और उन्हें एक सुरक्षित, सम्मानजनक और सकारात्मक माहौल सुनिश्चित करता है।
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. दीपक वर्मा ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि सुरक्षित एवं संवेदनशील वातावरण प्रदान करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन महिला कर्मचारियों व छात्राओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करेगा। जागरूकता सत्रों के माध्यम से व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना अत्यंत आवश्यक है।