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धान खरीद नहीं होने पर गरजे किसान

Tue, 15 Oct 2013 10:07 PM IST
असंध
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पिछले कई दिनों से धान की बोली नहीं होने से परेशान असंध क्षेत्र के किसानों ने मंगलवार को रोष व्यक्त किया। भाकियू के बैनर तले प्रदर्शनकारी किसानों ने सरकार, खरीद एजेंसियों व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रतन मान के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने चेताया कि यही रवैया बरकरार रहा और खरीद प्रक्रिया में तेजी नहीं आई तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा। भाकियू नेता मान ने कहा कि किसानों को एक साजिश के तहत बड़ी सफाई के साथ लूटा जा रहा है। पीआर धान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कहीं कम दाम पर खरीदा जा रहा है।

धान में नमी के नाम पर पहले कई कई दिन तक बोली ही नहीं दी जाती, जब किसान बेहद परेशान हो जाता है तो उनके धान को औने पौने दाम पर लूट लिया जाता है। ऊपर से विडंबना यह है कि बिक्री किए धान का फार्म जे तो समर्थन मूल्य के हिसाब से ही काटा जा रहा है लेकिन किसान को समर्थन मूल्य से कहीं कम दाम ही दिए जा रहे हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि इस लूट में व्यापारी, खरीद एजेंसियां व सरकार सहित प्रशासन भी शामिल हैं। हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड सचिव कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन पर बैठे किसानों के  मध्य पहुंचे एसडीएम विक्रम मलिक ने लिफ्टिंग की समस्या को शीघ्र हल करवाने का आश्वासन दिया। उन्होंने किसानों से मंडी में फसल सुखाकर लाने की अपील की। हलका प्रधान जोगेंद्र सिंह झींडा, शीशा सिंह, फतेह सिंह, तारा सिंह, परगट सिंह, सोनू, दलीप सिंह, लक्खा सिंह व बलविंदर सहित अन्य शामिल थे।

निसिंग में समस्याओं के खिलाफ भाकियू की हुंकार
भाकियू ब्लॉक प्रधान कुलदीप सिंह बब्बर ने अनाज मंडी में धान बेचने पहुंचे किसानों के साथ रेट व अन्य समस्याओं के लिए बातचीत की।

इसमें भाकियू नेता व किसान साहब सिंह, राजपाल, प्रताप सिंह, सिकंदर सिंह, संजय व रामभज शर्मा ने आढ़ती, व्यापारियों व कमेटी कर्मचारियों की मिलीभगत से किसानों के धान को लूटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अनाज मंडी में कई वर्षों से ढेरियों पर किसानों के सामने खुली बोली नहीं होती।

धान के रेट के बारे में किसान को उनके आढ़ती बताते हैं कि धान इन दामों पर बिकता है। किसान रात भर मंडी में ठहरने की परेशानी को देखते हुए उसे कम दामों पर बेच देते हैं। इसका व्यापारियों को भरपूर फायदा मिल रहा है। उन्होंने व्यापारियों व कमेटी कर्मचारियों पर मनमानी करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि धान सरकारी मूल्य से करीब दौ सौ रुपये कम में खरीदा जा रहा है। सरकारी धान को बाद में कमेटी रजिस्टर में चढ़ाया जाता है। मार्केट कमेटी सचिव धर्मराज डांगी ने बताया कि नमी वाले धान की ढेरी को सरकारी दामों पर नहीं खरीदा जा सकता। खुल्ली बोली पर भाकियू का आरोप है, जो हकीकत नहीं। मंडी में हैफेड व डीएफएससी की ओर से 11 बजे से बोली शुरू की जाती है।
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