फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: करनाल में मनोहर दांव, पुराने चेहरों पर भरोसा

विज्ञापन
विज्ञापन
- भाजपा ने घरौंडा व इंद्री से माैजूदा व नीलाेखेड़ी से पूर्व विधायक को चुनावी रण में उतारा, करनाल सीट पर नया चेहरा
विज्ञापन

- करनाल सीट से प्रत्याशी जग मोहन को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से नजदीकियों का मिला फायदा, पूर्व मेयर रेणु बाला गुप्ता भी प्रबल दावेदार थीं

देव शर्मा

करनाल। जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से चार सीटों पर भाजपा ने अपने धुरंधर उतार दिए हैं। तीन सीटों घरौंडा, इंद्री व नीलोखेड़ी पर भाजपा ने पुराने चेहरों पर भी भरोसा जताया है जबकि सीएम नायब सिंह सैनी ने करनाल सीट छाेड़ दी है। वह इस बार सैनी बहुल सीट लाडवा से भाग्य आजमाएंगे।
मई में नायब सैनी करनाल सीट से उपचुनाव जीते थे। अबकी बार भाजपा ने जातीय समीकरण साधते हुए पंजाबी बिरादरी से जगमोहन आनंद को उम्मीदवार बनाया है। जगमोहन केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के खास माने जाते हैं। उधर पूर्व मेयर रेणु बाला गुप्ता के हाथ से टिकट फिसल गया है जबकि बनिया चेहरे के रूप में उनकी दावेदारी प्रबल मानी जा रही थी।
विज्ञापन

चार घोषित सीटों में से भाजपा ने दो मौजूदा विधायकों पर फिर दांव खेला है। इनमें घरौंडा के विधायक हरविंद्र कल्याण और इंद्री के विधायक रामकुमार कश्यप शामिल हैं। ये दोनों भी मनोहर लाल के खासे नजदीकी माने जाते हैं। करनाल सीट से जगमोहन पहली बार चुनाव लड़ेंगे। इससे पूर्व वह पार्टी के विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वे मनोहर लाल के सीएम रहते मीडिया समन्वयक भी थे।
करनाल को शुरू से ही पंजाबी बहुल सीट माना जाता है। मनोहर लाल भी पंजाबी बिरादरी से आते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि नायब सिंह सैनी की करनाल सीट से उपचुनाव में जीत में मनोहर लाल का खासा प्रभाव रहा था लेकिन अबकी बार पार्टी ने इस सीट से पंजाब चेहरा ही उतारा है।
घरौंडा विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो भाजपा ने तीसरी बार हरविंद्र कल्याण को टिकट थमाई है। इनके सहारे जिले में अन्य विधानसभा क्षेत्रों में रोड़ बिरादरी को भी साधने का प्रयास किया गया है। जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में रोड़ बिरादरी के अच्छे खासे मतदाता हैं, जिनका भाजपा को लाभ मिल सकता है। विधायक की अपने क्षेत्र में छवि भी अच्छी बताई जा रही है, विकास कार्य भी घरौंड़ा में अच्छी खासी संख्या में कराए गए हैं।
इंद्री विधान सभा क्षेत्र में एक बार फिर राम कुमार कश्यप को वफादारी का भी सिला मिला है। जब वह इनेलो से राज्य सभा सदस्य थे, तब उन्होंने जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने पर भाजपा का समर्थन किया था। जिससे जेपी नड्डा आदि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की नजर में भी चढ़ गए थे। इसके साथ-साथ वह लगातार पार्टी को मजबूत करने में भी जुटे रहे। दूसरी बात कश्यप बिरादरी भी ऐसी बिरादरी है, जिसके मतदाता जिले की सभी पांचों विधान सभा क्षेत्रों में हैं, भाजपा ने राम कुमार कश्यप के सहारे इन मतदाताओं को भी साधने का प्रयास किया है।
नीलोखेड़ी विधान सभा क्षेत्र से पूर्व विधायक भगवानदास कबीरपंथी को भाजपा ने एक बार फिर मौका दिया है। इसकी वजह शायद पिछला चुनाव कम अंतर से हारना रहा है। दूसरा कारण ये भी है कि भाजपा में पिछली बार दो नेताओं की दावेदारी के कारण वोटों के बिखराव का भी भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा था। ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, यहां भगवानदास कबीरपंथी लगातार सक्रिय भी रहे हैं।

भाजपा को आस है कि पिछले चुनाव में कम अंतर की हार को उनकी पांच साल की मेहनत जीत में परिवर्तित कर देगी। कबीरपंथी भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के करीबी भी बताए जा रहे हैं।
विज्ञापन

अब असंध पर फंसा पेंच

जिले की असंध विधानसभा सीट से भाजपा ने अभी प्रत्याशी नहीं उतारा है। यहां कई प्रबल दावेदार हैं, यहां से पूर्व विधायक जिलेराम शर्मा को भी लोकसभा चुनाव के दौरान ही भाजपा में शामिल किया गया है। भले ही उस समय जिलेराम शर्मा ने बिना किसी शर्त भाजपा में शामिल होने की बात कही थी लेकिन ये बात भी किसी से छिपी नहीं है कि वह असंध से टिकट के प्रबल दावेदारों में शामिल हैं। अब तक जो टिकट भाजपा ने घोषित किए हैं, उनमें कई ब्राह्मण चेहरे हैं। फिलहाल तो मंथन चल रहा है। उधर, अन्य विपक्षी दल भी अब जल्द प्रत्याशियों की घोषणा कर सकते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें