करनाल। अमेरिका में इलाज के दौरान 73 वर्षीय महिला के मेडिकल खर्च का पूरा बीमा भुगतान न करना केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी की ओर से बीमा राशि को महज 10 प्रतिशत तक सीमित करने के फैसले को अनुचित मानते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
आयोग ने कंपनी को 90 हजार अमेरिकी डॉलर की शेष बीमा राशि भारतीय मुद्रा में 23 मार्च 2022 से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत देने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा महिला को मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए एक लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 22 हजार रुपये भी देने होंगे। कंपनी को आदेश की प्रति मिलने के 45 दिन के भीतर भुगतान करना होगा। ऐसा नहीं करने पर ब्याज की दर 12 प्रतिशत वार्षिक हो जाएगी।
सेक्टर-13 अर्बन एस्टेट निवासी पुष्पा अरोड़ा ने अपने पति जुगल किशोर के साथ अमेरिका जाने के लिए केयर हेल्थ इंश्योरेंस की ट्रैवल पॉलिसी ली थी। एक मार्च से 30 अप्रैल 2022 तक की सिंगल ट्रिप पॉलिसी में एक लाख अमेरिकी डॉलर का बीमा कवर था। इसके लिए उन्होंने 30,494 रुपये प्रीमियम दिया था। खास बात यह है कि पॉलिसी लेते समय पुष्पा अरोड़ा ने अपनी पहले से मौजूद बीमारी डायबिटीज मेलिटस की जानकारी बीमा कंपनी को दी थी। कंपनी ने बीमारी की जानकारी होने के बावजूद जोखिम स्वीकार किया और पॉलिसी जारी की।
चार दिन अस्पताल में चला इलाज
अमेरिका यात्रा के दौरान 19 मार्च 2022 को पुष्पा अरोड़ा की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें टेक्सास मेडिकल सेंटर स्थित मेमोरियल हरमन अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में एक्यूट हार्ट फेल्योर और एक्यूट नॉन-एसटी एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन सहित गंभीर हृदय संबंधी बीमारी सामने आई। उनका एंजियोप्लास्टी व पीसीआई उपचार किया गया। वे 23 मार्च तक अस्पताल में भर्ती रहीं। अस्पताल की ओर से इलाज का बिल 1,45,838.25 अमेरिकी डॉलर बनाया गया। पॉलिसी के तहत कंपनी का अधिकतम दायित्व एक लाख डॉलर था लेकिन कंपनी ने महिला के दावे को सिर्फ 9,900 डॉलर, यानी बीमा राशि के 10 प्रतिशत तक सीमित कर दिया। कंपनी ने इसके पीछे तर्क दिया कि महिला को पहले से डायबिटीज थी और यह एनएसटीईएमआई के लिए रिस्क फैक्टर है। महिला ने कंपनी से बार-बार पूछा कि किस पॉलिसी की शर्त के तहत भुगतान को 10 प्रतिशत किया गया है और इसका मेडिकल आधार क्या है, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कंपनी के रुख से परेशान होकर महिला के बेटे ने मामले को बीमा लोकपाल चंडीगढ़ के समक्ष उठाया। लोकपाल ने 12 दिसंबर 2023 को शिकायत को गुण-दोष के आधार पर खारिज नहीं किया बल्कि दावा राशि उसकी 30 लाख रुपये की आर्थिक अधिकारिता से अधिक होने के कारण मामले को आगे नहीं बढ़ाया।
कंपनी को दी गई थी बीमारी की जानकारी
जिला उपभोक्ता आयोग ने पाया कि पॉलिसी लेते समय डायबिटीज की जानकारी कंपनी को दी गई थी। कंपनी ने इसे स्वीकार करते हुए पॉलिसी जारी की और पूरा एक लाख डॉलर का बीमा कवर दिया। आयोग के अनुसार, कंपनी ने ऐसा कोई ठोस मेडिकल प्रमाण पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो कि महिला की डायबिटीज ही एनएसटीईएमआई का कारण बनी। महिला के उपचार करने वाले कार्डियोलॉजिस्ट ने भी प्रमाणित किया था कि पहले कोरोनरी आर्टरी डिजीज का कोई इतिहास नहीं था।