करनाल। रूस के उफा में 16 से 21 अगस्त तक आयोजित हुई विश्व जूनियर कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर लौटी बड़ौता गांव की खिलाड़ी संजू पुनिया का बसताड़ा टोल प्लाजा व बड़ौता गांव में जोरदार स्वागत किया गया। संजू ने कहा कि जब तक वह ओलंपिक में गोल्ड जीतकर नहीं आती तब तक शादी नहीं करेगी। संजू पूनिया ने जर्मनी की लूसिया शरेल को 5-2 से मात दी और 0-3 के अंतर से पिछड़ने के बावजूद वापसी करते हुए क्रोएशिया की इवा गेरिच को क्वार्टर फाइनल में 4-3 से हराया। सेमीफाइनल में अजरबेजान की बिरगुल सोलतानोवा से 0-5 से पिछड़ रही थीं लेकिन वापसी करते हुए उसे 8-5 के अंतर से शिकस्त दी। इसके बाद फाइनल में रूस की एलीना कसाबिएवा को कड़ी टक्कर देने के बावजूद रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। इधर गांव ब
घर की माली हालत प्रतिभाओं के आगे अड़ी
करनाल। बड़ौता गांव के किसान विजेंद्र के घर जन्मी संजू पुनिया का सपना ओलंपिक में स्वर्ण जीतकर लाने का है। वह कुश्ती खिलाड़ी फोगाट बहनों को अपना आदर्श मानती हैं। पिता विजेंद्र ने बताया कि उसके दो लड़के व तीन बेटियां हैं। पांचों बच्चे कुश्ती के खिलाड़ी हैं। वे गांव में छोटी काश्तकारी करते हैं। दो भाईयों के पास मात्र एक एकड़ जमीन है। ठेके पर जमीन लेकर खेती करते थे। कई वर्ष पहले उन्होंने ठेके पर जमीन लेनी छोड़ दी क्योंकि उसे नुकसान हो रहा था। इसलिए उन्होंने पूरा ध्यान बच्चों के भविष्य पर लगा दिया।
मांगी आर्थिक मदद
पिता विजेंद्र ने बताया कि उन्हें बच्चों को कुश्ती में आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत है। बेटियों को कुश्ती प्रतियोगिताओं के लिए जाने में पैसे की जरूरत पड़ती है। वहीं एक पहलवान की खुराक ही महंगी पड़ती है लेकिन घर में पांच पहलवान हो तो और मुश्किल हो जाता है। पहले कुछ लोग मदद कर देते थे लेकिन यह कम होती जा रही है। एक समाजसेवी ने तीनों बेटियों के भविष्य को लेकर 7500 रुपये महीना देने की बात कही थी लेकिन एक बार मदद के बाद वह भूल गए। उनका कहना है कि एक बेटी संजू ने रूस में विश्व चैंपियनशिप में रजत जीतकर अपनी प्रतिभा दिखाई है। उनकी तीनों बेटियों का कहना है कि जब तक ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण नहीं लातीं चैन से नहीं बैठेंगीं। पिता ने कहा कि उनकी तीनों बेटियां पढ़ाई में भी काफी तेज हैं वहीं वह खेल के साथ-साथ खेती-बाड़ी में भी अपना हाथ बंटातीं हैं।