माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। काछवा के निकट स्थित गुरबचन सिंह फाउंडेशन फॉर रिसर्च, एजुकेशन एंड डेवलपमेंट (जीएसएफआरईडी) के अनुसंधान केंद्र पर किसान मेला आयोजित किया गया। जिसमें विकसित कृषि नवाचारों और प्रौद्योगिकियों को किसानों के साथ साझा किया गया। एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल से आय दोगुनी करने की तकनीकि बताई गई।
पूर्व कृषि आयुक्त एवं पूर्व अध्यक्ष एएसआरबी डॉ.गुरबचन सिंह के संयोजन में आयोजित किसान मेले में फरो इरिगेटेड रेज्ड बेड प्लांटिंग (एफआईआरबी) तकनीक, प्राकृतिक और जैविक खेती की तकनीक, फलों और भूनिर्माण पौधों की गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री की जानकारी के साथ उच्च उपज देने वाली, जलवायु स्मार्ट, कीट प्रतिरोधी, गेहूं की नई किस्मों डीबीडब्ल्यू-327, डीबीडब्ल्यू-377, डीबीडब्ल्यू-386, पीबीडब्ल्यू-872 की जानकारी दी गई। मेले में विशेष तौर पर बाबा कश्मीर सिंह, बाबा जस्सा सिंह, आईसीएआर के पूर्व डीडीजी डॉ. एमएल. मदन, एमएचयू के कुलपति डॉ. एसके. मल्होत्रा, सीएसएसआरआई के निदेशक डॉ. आरके. यादव, पूर्व निदेशक डॉ. पीसी. शर्मा, राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो के निदेशक डॉ. एनएच. मोहन, जी, राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया सहित कई बड़े वैज्ञानिक व उद्यमियों ने मेले में सहभागिता की।
वैज्ञानिकों ने किसानों के कल्याण और बेरोजगार युवाओं व छात्रों में कौशल एवं उद्यमिता विकास के लिए जीएसएफआरईडी द्वारा शुरू की गई गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।
डॉ. एमएल मदान ने कृषि को टिकाऊ और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीला बनाने के लिए फसलों के साथ पशुधन को एकीकृत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।