विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस
- नागरिक अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में रोजाना पहुंच रहे 70 मरीज, इनमें 15 बच्चे शामिल
अनुज शर्मा
करनाल। माता-पिता की अपने बच्चों से बढ़ती दूरी तनाव का कारण बन रही है, जो आगे चलकर आत्महत्या के रूप में सामने आ रहा है। नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी में रोजाना पहुंच रहे तनाव से ग्रसित 70 मरीजों में से 50 ऐसे लोग हैं जिनके मन में आत्महत्या का विचार आ रहा है और इनमें से 20 एक से तीन बार आत्महत्या का प्रयास भी कर चुके हैं। इन 50 में 15 बच्चे शामिल हैं।
मनोरोग विभाग की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट संतोष ने बताया कि आजकल व्यस्त जीवनशैली में माता-पिता अपने बच्चों के लिए दिन में मात्र 10 मिनट का भी समय नहीं निकाल पा रहे हैं। जिससे बच्चों में तनाव बढ़ता जा रहा है और उनमें आत्महत्या का विचार आ रहा है। ऐसे में अभिभावकों को रोजाना अपने बच्चों को कम से कम 10 मिनट देने चाहिए और इस दौरान वे उनकी दिनचर्या से लेकर उनकी जीवन में चल रही उधेड़बुन को जान सकते हैं। जिससे उनके मन में आत्महत्या का विचार न आ सके। उन्होंने बताया कि तनाव से घिरे बच्चों में उदासी, निराशा, किसी काम में मन न लगना, रोने का मन करना, चिड़चिड़ापन, किसी काम का निर्णय न ले पाना, हरदम थकान लगना व जिंदगी व्यर्थ समझना इत्यादि लक्षण देखे जा सकते हैं। संवाद
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य के बढ़ रहे मामलों को देखते हुए हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस यानी कि वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है, ताकि मानसिक स्वास्थ्य के बारे में लोगों को जागरूक किया जा सके और इसके गंभीर प्रभावों को कम किया जा सके।
ये संकेत देते है चेतावनी
सामाजिक कार्यकर्ता विकास ने बताया कि मृत्यु के बारे बात करना, निराशा का अनुभव, लगातार विचार आना, मादक पदार्थ या शराब के उपयोग में वृद्धि, मित्रों एवं परिजनों से दूरी बनाना, ऐसी बातें जिनसे कुछ करने का एहसास हो, आक्रामकता, अनियंत्रित क्रोध, बदला लेने की भावना व पूर्व में आत्महत्या के प्रयास शामिल हैं।
ऐसे करें तनाव कम
नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करें, अपने खाने-पीने का ध्यान रखें व स्वास्थ्यवर्धक भोजन खाएं, स्वयं को व्यस्त रखे व मनोरंजन के अधिक साधन अपनाएं जैसे की सैर करना, अखबार पढ़ना संगित इंडोर या आउटडोर खेल खेलना इत्यादि, टीवी मोबाइल फोन का ज्यादा प्रयोग न करें, घर में कोई भी नशीला पदार्थ व दवाइयां ना रखें, योगा और मेडिटेशन को अपनाएं, बच्चों से खुलकर बातें करें व उनको समय दें।