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यूक्रेन में दोस्ती, मास्को में प्यार, कुरुक्षेत्र में लिए फेरे

Tue, 19 Nov 2013 11:49 AM IST
कुरुक्षेत्र
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यूक्रेन में आंखें चार, मास्को में इश्क परवान और भारत में सात जन्मों तक साथ निभाने का संकल्प लेते हुए साइबेरिया की दुल्हन ने अपना हाथ हिंदू धर्म अपनाने वाले रूस के युवा वीताल के हाथों में दे दिया।
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हालांकि प्रेमी और प्रेमिका दोनों जन्म से क्रिश्चियन है, लेकिन हिंदू रीति-रिवाज से शादी करने के साथ यह युगल जीवन भर हिंदू संस्कृति और मान्यताओं के साथ जीने की बात कर रहा है।

इस निर्णय में भले दोनों की बराबर की सहमति हो, मगर भारतीय परंपराओं के प्रति के लगाव रखने वाली साइबेरिया निवासी गैलाडिवा का खास योगदान है।

दूल्हा-दुल्हन भले विदेशी हों, लेकिन भारत में आकर शादी करने के बाद इनका पूरा फोकस शुद्ध देसी रोमांस पर है।

मॉस्को के रहने वाले वीताल कंप्यूटर इंजीनियर हैं, जबकि साइबेरिया की गैलाडिवा एक चित्रकार।

इन दोनों के मुताबिक डेढ़ वर्ष पहले वे पहली बार यूक्रेन में मिले और इसके बाद दोनों की मुलाकातों का सिलसिला जारी रहा।

भारतीय संस्कृति के दीवाने इस प्रेमी युग ने भारत में जाकर शादी रचाने का प्लान बनाया और यहां आकर हिंदू परंपराओं के साथ विवाह किया।

इस नवदंपति को जहां पहले भले हिंदी के शब्द का भी ज्ञान नहीं था, वहीं अब ऐसे कई शब्द हैं, जिसे ये दोनों काफी सहजता से संबोधित करने लगे हैं।

भारतीय दर्शन और आध्यात्म के मुरीद वीताल और गैलाडिवा हिंदू देवी-देवताओं के अलावा यहां के धर्मग्रंथों, महात्माओं और महापुरुषों की भी जानकारी रखते हैं।

अभी तक भारत में उन्होंने हरिद्वार, ऋषिकेश और धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के दर्शनीय स्थल देखे और यहां के देवालयों में पूजा अर्चना की।

अमर उजाला से भेंट के दौरान गैलाडिवा ने हरिद्वार, ऋषिकेश और केदारनाथ के अलावा गंगोत्री और कुरुक्षेत्र गीता जन्मस्थली पर बनाई गई अपनी अद्भुत पेंटिंग भी दिखाई। वहीं इस जोड़े में राष्ट्रपति महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम को देखने की ललक भी सामने आई।
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इन्होंने गुजरात जाकर वहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मस्थली और साबरमती आश्रम के बारे में जानकारी ली। बापू के व्यक्तित्व से प्रभावित यह जोड़ा मंगलवार को गुजरात के लिए रवाना होगा।

भारत भ्रमण की खट्टी-मीठी यादें सांझा करते हुए इस जोड़े ने रेल की सेवाओं पर अंगुली उठाए बिना नहीं रहे।

देवी-देवताओं को समर्पित गैलाडिवा के चित्र
चित्रकार गैलाडिवा ने अपने हाथों से कई देवी-देवताओं और मठ, मंदिरों और धार्मिक स्थलों के अलावा पवित्र नदियों के चित्र तैयार किए हैं, जिनमें पहाड़ों में गंगोत्री नदी को निहारते शिव-पार्वती, बफीले पहाड़ों से घिरा भगवान केदारनाथ धाम मंदिर, ज्योतिसर गीता जन्मस्थली का अक्षय वट, सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी और शनि के सुंदर चित्र शामिल हैं।
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