संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पहले जहां ग्रामीण महिलाएं घर से निकलने में भी संकोच किया करती थीं, वहीं आज महिलाएं लखपति दीदी बन सशक्त हो रही हैं। इसमें हर साल एक लाख से अधिक आमदनी करने वाली ग्रामीण महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही हैं। पिछले दो साल में अब तक जिले की 13 महिलाओं को औपचारिक रूप से लखपति दीदी का दर्जा मिल चुका है जबकि कुल 9502 महिलाएं ऐसी हैं जो सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आमदनी अर्जित कर रही हैं।
स्वयं सहायता समूह योजना के जिला परियोजना प्रबंधक गुरमीत का कहना है कि यह योजना न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधार रही है बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान भी दिला रही है। इस योजना से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं अलग-अलग प्रकार के रोजगार का प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वयं का रोजगार स्थापित कर रही हैं। इनमें अब तक 4648 महिलाएं कृषि कार्यों में सक्रिय हैं, 1482 महिलाएं गैर-कृषि व्यवसायों में लगी हैं और 2715 पशुपालन और अन्य संबंधित कार्यों से आय अर्जित कर रही हैं।
- 28 हजार को लखपति दीदी बनाने का उद्देश्य
प्रबंधक गुरमीत ने बताया कि हजारों महिलाएं आय के स्तर पर लखपति बन चुकी हैं लेकिन अब तक 13 महिलाओं को ही आधिकारिक रूप से लखपति दीदी का दर्जा दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस साल 28 हजार लखपति दीदी बनाने का उद्देश्य है जिसमें अलग-अलग कौशलों का प्रशिक्षण दिलवाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
- जिद्द कर खोली दुकान, बनी लखपति दीदी
असंध से लखपति दीदी ममता ने बताया कि वह ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है। वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहती है। वह वर्ष 2019 में समूह से जुड़ी थीं शुरुआत में काफी मुश्किलें आईं जिसमें पति व सास-ससुर ने मना किया। जिद्द से दुग्ध उत्पादन का प्रशिक्षण लिया और स्वयं की दुकान शुरु की। वर्तमान में हर साल पांच लाख रुपये से अधिक आमदनी कर वह लखपति दीदी का दर्जा प्राप्त कर चुकी हैं।