कुरुक्षेत्र।
केयू संगीत विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि कलाकार समाज
का अभिन्न अंग है। कलाकार को समाज की संपत्ति कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं
होगी।
समाज को नई दिशा देने और संस्कृति को सहेज कर रखने में कलाकार की
महत्वपूर्ण भूमिका है। वे वीरवार को को मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर के सभागार
में सूचना, जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से आयोजित रोहतक
मंडल के भजन पार्टी एवं खंड प्रचार कार्यकर्ताओं की चार दिवसीय कार्यशाला
में तीसरे दिन मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
समाज के हर व्यक्ति से
कलाकार सहजता से जुड़ सकता है और गीतों व भजनों के माध्यम से अपनी हर बात
लोगों के जहन तक पहुंचा सकता है। कलाकारों को अपनी बात या गीतों को
प्रभावशाली बनाने के लिए जहां तथ्यों का समावेश होना चाहिए, वहीं गीतों में
रोचकता और स्वरों का ध्यान भी रखा जाना चाहिए।
अगर कलाकार के गीतों में
सुर-लय और तथ्यों का संगम होगा तो निश्चित ही लोग कलाकारों द्वारा कही बात
पर तुरंत अमल करेंगे। इसलिए कलाकार को पुराने और नए रागों को जोड़कर अपने
गीत और संगीत को रोचक बनाना होगा। संगीत को रोचक बनाने के लिए रागों को
जोड़ना होगा। डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि भैरवी के सौ रंग होते हैं। हर रंग
से कई तरह के राग, धुन तैयार की जा सकती हैं।
भैरवी राग में सारे स्वर आम
होते हैं। उन्होंने कॉमन और शुद्ध स्वरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि
कलाकार को निरंतर रियाज करते रहना चाहिए और रोजाना संगीत की दुनिया में
डूबकर कुछ नया तैयार करने का प्रयास करना चाहिए। डॉ. अशोक कुमार ने इस सत्र
में भैरवी, दरबारी व भैरवी देस राग को गाकर कलाकारों को अपने साथ अभ्यास
करवाते हुए कहा कि कलाकारों को रोजाना सुबह और शाम के समय कुछ समय निकालकर
इन रागों का रियाज करना होगा तभी अपने गीतों को प्रभावी बना सकते हैं।
दोपहर के सत्र में लेखक एवं गीतकार मांगे राम खत्री ने रोहतक मंडल के जिला
सोनीपत, पानीपत, करनाल, झज्जर व रोहतक से आए भजन मंडली के सदस्यों को गीत
लिखने की कला के बारे में जानकारी दी और कलाकारों से मौके पर ही एक दर्जन
से ज्यादा गीतों को लिखवाया। इस मौके पर कार्यशाला के संयोजक एवं एआईपीआरओ
नरेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।