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Karnal News: छात्रवृत्ति परीक्षा के नाम पर स्क्रीनिंग टेस्ट लेकर देते हैं दाखिले

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- निजी स्कूलों का दाखिले और फीस में खेल : पहले टेस्ट कराकर मेधावी छात्र छांटते, बाद में मेरिट बना फीस में छूट का लालच
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- स्क्रीनिंग टेस्ट न कराने का विभाग ने अब जारी किया निर्देश, स्कूलों ने फरवरी-मार्च में ही यह प्रक्रिया पूरी करके दाखिले दे दिए



माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। स्क्रीनिंग टेस्ट लेकर स्कूलों की ओर से दाखिला न देने के निर्देश शिक्षा निदेशालय ने अब जारी किए हैं। जबकि नामी निजी स्कूल इस तरीके से दाखिले की प्रक्रिया करीब दो माह पहले पूरी कर चुके हैं। पकड़ में न आ जाएं इसलिए इसे लेकर भी कई स्कूल गड़बड़ी करते हैं।

वे छात्रवृत्ति परीक्षा के नाम पर स्क्रीनिंग टेस्ट रखते हैं। बाद में परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में फीस में छूट का लालच देते हुए अपने स्कूल में दाखिल करते हैं। इससे भी कई राजकीय स्कूलों के मेधावी विद्यार्थी निजी स्कूलों के जाल में फंसते हैं। बाद में अलग-अलग मद के रूप में मोटी फीस की मांग में फंसने पर मजबूरन कई अभिभावकों को बच्चों का स्कूल भी बदलना पड़ता है।
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अब विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि किसी भी सरकारी या निजी स्कूल में दाखिला लेने वाले बच्चे का स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं लिया जाएगा। अगर किसी स्कूल के खिलाफ कोई शिकायत मिली तो उसे 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का भुगतान करना होगा। स्क्रीनिंग टेस्ट शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 13 की अवहेलना है।

जिले में कई स्कूलों ने फरवरी और मार्च माह में छात्रवृत्ति टेस्ट का आयोजन किया था। निजी या सरकारी स्कूलों में दूसरा स्कूल छोड़कर या फिर फ्रेश बच्चों का दाखिला लेने से पहले स्क्रीनिंग टेस्ट लिया जाता है। इस टेस्ट को कई बार विद्यार्थी पूरी तरह से पास नहीं कर पाता, जिसके बाद उसे स्कूल में दाखिला मिलना संभव नहीं हो पाता। निजी स्कूलों की बात की जाए तो स्क्रीनिंग टेस्ट में ही बच्चों को इस तरह प्रश्न पूछ लिए जाते हैं कि वे पूरी तरह से उलझ जाते हैं। कुछ स्कूल संचालक स्क्रीनिंग टेस्ट में बच्चों की लिखित परीक्षा भी लेते हैं और बाद में उसकी परीक्षा में नंबरों के आकलन के बाद उसे दाखिला दिए जाने या नहीं दिए जाने पर विचार किया जाता है।



हर चौथा स्कूल छात्रवृत्ति दे रहा, फीस में 50 प्रतिशत तक छूट

सीबीएसई के 119 और हरियाणा बोर्ड के 270 से ज्यादा निजी स्कूल हैं। कई स्कूलों ने फीस और किताबों में राहत देने के अलावा छात्रवृत्ति देने की योजना बनाई है। अभिभावक संघ और शिक्षा के लिए काम कर रहे एडवोकेट राजकुमार का दावा है कि हर चौथा स्कूल इस तरह की योजना चला रहा है। इसके तहत रविवार को परीक्षा का आयोजन किया जाता है। जिनमें मेरिट के आधार पर वर्ष में छात्रवृत्ति दी जाती है। ये छात्रवृत्ति भी केवल नया दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए होती है। इसमें भी नकद राशि देने की बजाय सालाना फीस एक साथ जमा कराने पर 30 से 50 प्रतिशत तक की छूट के रूप में इसमें समायोजित की जाती है।



कई बार होशियार बच्चे भी हो जाते हैं फेल

जो बच्चे काफी होशियार माने जाते हैं, कई बार वे भी स्कूल के स्क्रीनिंग टेस्ट में फेल निकाल दिए जाते हैं। जिसके बाद उस बच्चे के पास दूसरे स्कूलों में दाखिले के लिए भागदौड़ के अलावा कुछ नहीं बचता। ऐसे में बच्चे व अभिभावकों का काफी समय व पैसा भी बर्बाद होता है।
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अब कोई भी स्कूल दाखिले के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं ले सकता। इस तरह से टेस्ट लेने वाले स्कूल प्रबंधन पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। विभाग की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत किसी भी बच्चे को उसके पसंदीदा स्कूल में दाखिले से वंचित नहीं रखा जा सकता।
- सुदेश ठुकराल, जिला शिक्षा अधिकारी
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