बदले मौसम ने बीमारियां बढ़ा दी हैं। इससे सिविल अस्पताल ओवरलोडिड हो गया
है। डेंगू, मलेरिया, बुखार और उल्टी दस्त के मरीजों की संख्या लगातार बढ़
रही है। बीमार होने वाले में बच्चों की संख्या भी ज्यादा है। अहम बात यह है
कि पिछले दस साल में अब तक के सबसे ज्यादा मरीज अस्पताल में पहुंच चुके
हैं।
हालांकि अस्पताल की क्षमता 200 बेड की है, लेकिन ऑन रिकार्ड अस्पताल
में 358 मरीज दाखिल हैं। इसके अलावा, अब तक की रिकार्ड ओपीडी हुई है, जिसकी
संख्या 3 हजार के पार पहुंच गई है। सामान्य सिविल अस्पताल में 200 से 250
मरीज दाखिल रहते हैं और ओपीडी भी दो हजार से ढाई तक पहुंच गई है। आलम यह है
कि अस्पताल के हर ओपीडी कमरे के बाहर मरीजों की लाइनें लगी हैं, बेडों की
बात करें तो एक एक बेड पर दो से तीन मरीज लेटे हैं। कुल मिलाकर अस्पताल
ओवरलोडिड हो गया है और अफरातफरी का माहौल बना है।
इस स्थिति से खुद
डॉक्टरों के पसीने छूटे हैं। सोमवार को सिविल अस्पताल का अमर उजाला टीम ने
दौरा किया। इस दौरान अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा। मरीजों से ओपीडी रूम
खचाखच भरे मिले। अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज बुखार के आ रहे हैं। इनमें
रोजाना पांच से सात लोग संदिग्ध डेंगू के आ रहे हैं। बुखार बच्चों को भी
अपनी चपेट में ले रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि
रोजाना 400 बीमार बच्चे अस्पताल आ रहे हैं। इसके अलावा, सामान्य बीमारियों
के मरीज भी बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस सप्ताह अचानक बीमारियां
बढ़ गई है। बुखार और मलेरिया के मरीज चेकअप के लिए आ रहे हैं।
एक दिन का आंकड़ा
कुल ओपीडी-3000
बाल रोग -400
दंत रोग-150
मेडिसन-650
ईएनटी-300
स्किन-400
हड्डी रोग- 350
गायनी-450
अन्य : 300
डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की मांग उठी
डॉक्टरों
का कहना है कि जिस प्रकार मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसी प्रकार
डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए। फिलहाल सिविल अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में
30 डॉक्टर हैं, लेकिन यह नाकाफी हैं। इनमें से भी कुछ डॉक्टर्स की ड्यूटी
पोस्टमार्टम हाउस या फिर कोर्ट केस में होती है। ऐसे में डॉक्टर चाहकर भी
मरीज चेकअप के लिए पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। सुबह आठ बजे से लेकर दो
बजे की बजाय तीन बजे तक ओपीडी रूम के बाहर लाइन लगी रहती है। इतने मरीजों
को देखने के लिए कम से कम 25 डॉक्टर और चाहिए।
गालीगलौज और मारपीट तक पहुंची नौबत
ओपीडी
रूम के बाहर अपने नंबर के लिए खड़े मरीज आपस में ही उलझ पड़ते हैं। इसके
अलावा तंग होकर मरीज डॉक्टर और स्टाफ के साथ भी गालीगलौज पर उतारू हो जाते
हैं। चेकअप के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। हर पांच मिनट में
लाइन में लगने को लेकर स्टाफ व मरीजों के बीच नोकझोंक हो रही है। अस्पताल
प्रबंधन के अधिकारी भी इससे परेशान हो चुके हैं। भीड़ के कारण दोपहर दो बजे
के बाद भी ओपीडी चलती है।
एक्सरे और टेस्ट नहीं आसान
मेडिकल
कॉलेज में एक्सरे, सीटी स्कैन और टेस्ट आसान नहीं है। पिछले एक सप्ताह में
बढ़ी मरीजों की संख्या के कारण लैब में टेस्ट ही दो गुने हो गए हैं। खून,
बलगम और पेशाब के टेस्टों की संख्या अचानक से बढ़ गई है। लैब और एक्सरे रूम
के बाहर जमा भीड़ को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि अस्पताल में मरीजों
की संख्या किस कद्र बढ़ रही है।
ये दवा नहीं आसान
अव्वल तो
मरीज का चेकअप ही नहीं हो पाता, अगर चेकअप हो भी जाए तो उसको दवा मिलना
आसान नहीं है। दवा काउंटरों पर घंटों तक लाइन में खड़ा रहने पड़ता है। इसके
अलावा, डिस्पेंसरी में सभी तरह की दवाइयां भी नहीं मिलती। कविता, सुनील ने
बताया कि वे सुबह से लाइन में खड़े थे, लेकिन मात्र दो दवा ही यहां से मिल
पाई। वहीं, मरीजों ने मांग की कि भीड़ को देखते हुए दवा काउंटरों की
संख्या बढ़ाई जाए।
सीएमओ नहीं, कैसे चलें जागरूकता कार्यक्रम
बदलते
मौसम में बढ़ रहे मरीज और बढ़ता डेंगू स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता
कार्यक्रम पर सवाल उठा रहा है। अस्पताल प्रबंधन के लोग ही इस बात को
स्वीकार करते हैं कि फील्ड स्टाफ की कमी के कारण ऐसी नौबत आ रही है।
स्वास्थ्य विभाग सीएम सिटी के लिए कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से
लगाया जा सकता है कि यहां पर सीएमओ नहीं है, डॉ. अनीता अग्रवाल को चार्ज
दिया गया है। इसके अलावा तीन डिप्टी सीएमओ के पद खाली हैं। वहीं डॉक्टरों
की बात करें तो जिले में करीब 100 डॉक्टरों की कमी है।
अस्पताल
में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो रही
है। हमने स्थिति को देखते हुए तुरंत प्रभाव से विभाग से 25 और डॉक्टर
मांगें हैं। यहां पर बेड 200 हैं और दाखिल मरीज 358 हैं। हमारी पूरी कोशिश
है कि मरीजों को बेहतर इलाज दिया जाए, बावजूद इसके भीड़ ज्यादा होने के
कारण परेशानी पैदा होती है। मौसम बदलाव के कारण बीमारियां बढ़ी हैं, इसमें
लोगों का सावधानी बरतनी चाहिए, डेंगू के डर के कारण भी ओपीडी बढ़ी है।
डॉ. योगेश शर्मा, अधीक्षक, मेडिकल कालेज।
ओपीडी
और दाखिल मरीजों की संख्या क्षमता से दो गुना हो गई है, इस कारण समस्या
पैदा हो रही है। कम सुविधाओं में बेहतर इलाज की कोशिश है। फिलहाल स्थिति
नियंत्रण में है।
डा. सुरेंद्र कश्यप, डायरेक्टर, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज।