करनाल। कम उम्र की युवतियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओडी) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना ओपीडी में पांच से छह किशोरियां व युवतियों पीसीओडी की समस्या लेकर पहुचं रही हैं। 14 वर्षीय किशोरी को काफी समय पीसीओडी से जुझ रही थी जिसमें लक्षण न पहचान पाने के कारण स्थिति गंभीर होती चली गई। जाचं करने पर पता चला की पिछले काफी समय से मासिक धर्म नियमित रूप से नहीं आ रहे थे जिसके कारण स्वास्थय पर गंभीर असर हो रहा था। बढ़ता तनाव, पढ़ाई का दबाव और असंतुलित जीवनशैली इस समस्या का प्रमुख कारण बन कर सामने आ रहे हैं।
स्त्री रोग चिकित्सक डाॅ. वैशाली ने बताया कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एक हार्मोनल समस्या है, जिसमें ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बनने लगते हैं। पहले यह समस्या 25 से 30 वर्ष की महिलाओं में अधिक देखी जाती थी, लेकिन अब 13 से 18 वर्ष की किशोरियों में भी तेजी से बढ़ रही है। खासतौर पर स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियां इसकी चपेट में आ रही हैं। मानसिक तनाव भी इसकी बड़ी वजह बनकर उभर रहा है। समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह समस्या आगे चलकर बांझपन, डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों का कारण भी बन सकती है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के खानपान और दिनचर्या पर ध्यान दें। यदि पीरियड्स में अनियमितता या अन्य लक्षण नजर आएं तो तुरंत जांच कराएं। सही समय पर इलाज और जीवनशैली में सुधार से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
-ये हैं प्रमुख लक्षण
पीरियड्स का अनियमित होना
अचानक वजन बढ़ना
चेहरे पर पिंपल्स और अनचाहे बाल
बालों का झड़ना
थकान और मूड स्विंग
-ऐसे करें बचाव
रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें
जंक फूड से दूरी बनाएं
पर्याप्त नींद लें
मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम करें
योग और मेडिटेशन अपनाएं