आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बार-बार सोचते रहना यानी ओवरथिंकिंग एक आम समस्या बन चुकी है। छोटी-छोटी बातों को जरूरत से ज्यादा सोचते रहना, भविष्य की चिंता में उलझे रहना और बीती बातों को बार-बार याद करना मानसिक थकान बढ़ा देता है। जिला नागरिक अस्पताल से मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि ऐसे में कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी आपके लिए काफी सहायक हो सकती है। ओवरथिंकिंग के इलाज में थेरेपी सबसे प्रभावी उपाय मानी जाती है और कई मामलों में दवा की जरूरत भी नहीं पड़ती। ओवरथिंकिंग में सबसे ज्यादा उपयोगी कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी है। इस थेरेपी में व्यक्ति को यह सिखाया जाता है कि नकारात्मक और बार-बार आने वाले विचारों को कैसे पहचाना जाए और उन्हें सकारात्मक व व्यावहारिक सोच से कैसे बदला जाए। कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी के जरिए मरीज यह समझ पाता है कि हर सोच सच नहीं होती और हर चिंता पर दिमाग लगाना जरूरी नहीं है। इसके अलावा, माइंडफुलनेस थेरेपी भी ओवरथिंकिंग में कारगर मानी जाती है। इसमें व्यक्ति को वर्तमान में जीना सिखाया जाता है। सांस पर ध्यान, बॉडी अवेयरनेस और ध्यान अभ्यास के जरिए दिमाग को भटकने से रोका जाता है, जिससे सोच की रफ्तार धीमी पड़ती है और मानसिक शांति मिलती है। कुछ मामलों में रिलैक्सेशन थेरेपी दी जाती है, जिसमें गहरी सांस लेने, मसल रिलैक्सेशन और इमेजिनेशन तकनीक के माध्यम से दिमाग और शरीर दोनों को शांत किया जाता है। इससे तनाव हार्मोन कम होते हैं और बार-बार सोचने की आदत पर नियंत्रण आता है।
ध्यान रखें
ओवरथिंकिंग के साथ नींद न आना, घबराहट या दिल की धड़कन तेज होना जैसी समस्याएं जुड़ जाएं, तो सीमित समय के लिए दवा के साथ थेरेपी दी जाती है। अधिकतर मामलों में सही काउंसलिंग और थेरेपी से ही सुधार संभव है।
-ओवरथिंकिंग कमजोरी नहीं, बल्कि एक मानसिक आदत है, जिसे सही समय पर थेरेपी से बदला जा सकता है। समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेकर व्यक्ति फिर से संतुलित और सुकून भरी ज़िंदगी की ओर लौट सकता है। -डॉ. सौभाग्य कौशिक, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल