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Karnal News: हादसे में खोया पति, दो जून की रोटी के लिए मजदूरी को मजबूर

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- दशहरे के दिन पति की गई जान, तीन बच्चों का खुद कर रही पालन पोषण
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प्रवीन भार्गव
निसिंग। दशहरे का दिन था, हम सब खुश थे। मेरे पति राजेश कुमार (35), मैं और तीनों बच्चों ने दशहरे का मेला देखा और शाम को घर लौट आए। मेरे पति पंजाब के समाना में एक कंपनी में काम करते थे। उनकी रात की ड्यूटी थी तो वह उस दिन तैयार होकर रात को करीब 8.30 बजे स्कूटी पर सवार होकर घर से निकल पड़े। मैं और तीनों सोने लगे तो रात को करीब 10 बजे मेरे पति के नंबर से फोन आया, जिस पर एक व्यक्ति बोला कि जिनका यह फोन है, उनका एक्सीडेंट हो गया है। वह घायल है।
यह सुनते ही मेरे होश उड़ गए। मैंने तुरंत बच्चों को उठाया और अपने परिवार को इसके बारे में बताया। वह हादसे की जगह पहुंचे तो पति बेसुध थे। वह उसे अलग-अलग अस्पताल लेकर गए। उनके कान से खून निकल रहा था। इसके बाद वह करनाल एक प्राइवेट अस्पताल में उन्हें लेकर आए लेकिन इलाज के दौरान मेरे पति हम सब को छोड़कर चले गए। यह दर्द भरी दास्तां दमनहेड़ी गांव निवासी राजेश कुमार की पत्नी अनीता की है। वह आज दो बेटी व एक बेटा आर्यन के साथ रह रही है और उनका पालन पोषण करने के लिए मजदूरी कर रही है। संवाद
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ऐसे हुआ हादसा
राजेश कुमार की पत्नी अनीता ने बताया कि उसके पति के साथ हादसा पेहवा-पटियाला रोड पर रामनगर के पास हुआ था। उन्हें किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। जिसका आज तक पता नहीं चला। हादसे के दौरान वह सड़क पर पड़े थे तो राहगीरों ने उन्हें उठाया था। उस समय उन्हें थोड़ा-थोड़ा होश था। इसके बाद ही राहगीरों ने उन्हें हादसे की सूचना दी थी।

उसी दिन आए थे ससुराल से
अनीता ने बताया कि उसका गांव बालू है। उसका पति दो दिन पहले उसे और तीनों बच्चों को मेरे मायके लेकर गया था। वहां वह दो दिन रहे। दशहरा होने के कारण वह उसी दिन दमनहेड़ी गांव आए थे क्योंकि उन्हें रात को ड्यूटी पर जाना था तो उन्होंने दिन में दशहरे का मेला देखा। उन्हें क्या पता था कि खुशी के ये दो पल हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे।

नहीं मनाया त्योहार
राजेश कुमार की पत्नी अनीता ने बताया कि उसके पति की मौत होने पर उनका सब कुछ खत्म हो गया है। उन्होंने अभी तक कोई त्योहार नहीं मनाया है। उन्हें अब कुछ भी अच्छा नहीं लगता, हर पल पति की ही याद आती है। उन्हें नहीं पता था कि भगवान उनके साथ ऐसा करेगा। उनका सब कुछ छिन गया है।
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यातायात के नियमों को करें पालन
अनिता ने कहा कि जो लोग वाहनों को चलाते हैं वह देखकर वाहन चलाएं। यातायात नियमों का पालन करें। यदि किसी से कोई हादसा होता है तो उस घायल व्यक्ति को अस्पताल जरूर पहुंचाएं ताकि उसकी जान बच सके। इन हादसों के कारण बहुत से घर उजड़ चुके हैं। हादसे के बाद जिस परिवार का व्यक्ति चला जाता है उसे ही पता होता है उसके साथ क्या हुआ है। इसलिए वाहनों को संभलकर चलाएं। अपनी और दूसरों की जान बचाएं।
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