करनाल। जौ को केवल पशुचारे या सीमित खाद्य उपयोग वाली फसल मानने के बजाय किसान इसे आमदनी बढ़ाने का माध्यम बना सकते हैं। छिलका रहित जौ पोषण से भरपूर होने के साथ खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोलता है। इससे रोटी, दलिया, सत्तू, राबड़ी और इडली जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान में शनिवार को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को इसकी वैज्ञानिक खेती, पोषण संबंधी विशेषताओं और मूल्य संवर्धन से कमाई बढ़ाने के तरीके बताए गए।
छिलका रहित जौ : स्वास्थ्य व समृद्धि विषय पर आयोजित प्रशिक्षण में हरियाणा और उत्तराखंड के किसानों ने भाग लिया। इनमें 25 महिला किसान भी शामिल हुईं। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. अनुज कुमार और डॉ. सोनिया श्योरान ने संस्थान की उन्नत किस्मों डीडब्ल्यूएबी 223 और डीडब्ल्यूएबी 244 को अपनाने, गुणवत्तापूर्ण उपज लेने तथा बाजार की मांग के अनुसार खाद्य उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया। संस्थान के निदेशक डॉ. ओमवीर सिंह और मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. मंगल सिंह मौजूद रहे।