आमदनी अठन्नी और खर्च रुपैया। यह कहावत इन दिनों रोडवेज पर चरितार्थ हो रही है। रोडवेज बसों का संचालन डिपो को किस कदर महंगा पड़ रहा है, इसकी बानगी शुक्रवार को देखने को मिली, जबकि करनाल से पानीपत गयी एक बस को आने-जाने में यात्री टिकटों से 500 रुपये की आमदनी हुई, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसताड़ा के समीप स्थित टोल प्लाजा पर उसे 800 रुपये टैक्स चुकाने पड़े। यही नहीं आने-जाने में चालक-परिचालक और डीजल का खर्च अलग से है।
आम जनता जहां करनाल-दिल्ली आते-जाते टोल टैक्स को भारी भरकम बोझ बताती है, वहीं रोडवेज विभाग को भी अब टोल टैक्स अखर रहा है। कारण कि आमदनी हो नहीं रही जबकि टैक्स पूरा देना पड़ रहा है। दरअसल करनाल डिपो से बुधवार को रोडवेज की एक बस पानीपत के लिए भेजी गई थी, जिसमें पुराना बस स्टैंड से मात्र दो सवारी चढ़ी। रास्ते मेें शहर से ही दस और यात्री सवार हो गए। इन यात्रियों से टिकट की एवज में करीब 500 रुपये राजस्व मिला होगा, जबकि आते-जाते बस का 800 रुपये टोल टैक्स चुकाना चालक और परिचालक को नागवार गुजरा। रोडवेज डिपो स्टेशन अधीक्षक साहब सिंह का कहना है कि अभी सवारियों की कमी है जिस कारण बस में पर्याप्त यात्री नहीं होते। वहीं कोरोना संक्रमण के कारण बस में 30 तक ही यात्री बैठा सकते हैं। उसमें भी सोशल डिस्टेंसिंग, स्क्रीनिंग व सैनिटाइजेशन का पूरा ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बसों का संचालन घाटे में ही किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना न करना पड़े।