संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। असंध के रामनगर में दंपती हरी सिंह और लीला देवी की हत्या करने का आरोपी पोता रविंद्र लंबे समय से बाबा के वेश में रह रहा है। अक्सर असंध के दादा खेड़ा और गोशाला में जाकर पूजा पाठ और सेवा करता था। उसकी इच्छा थी कि वह मंदिर बनाकर खुद उसमें महंत बनकर बैठे। सुल्फा पीने का आदी होने के कारण उसके पास रुपये नहीं थे।
आरोपी दादा के मकान की जमीन पर खुद का मंदिर बनाना और अपने घर के अंदर कबाड़ी का काम करना चाहता था। पुलिस के अनुसार ऐसे में आरोपी ने दादा-दादी की योजना बनाकर हत्या की। आरोपी वारदात के समय सुल्फे के नशे में था। इन बातों का खुलासा पुलिस की पूछताछ में हुआ है।
कई चोरियों में शामिल रहे प्रदीप और गुलशन
आरोपी पोते रविंद्र ने दादा-दादी की हत्या करने की योजना बहुत पहले से बनाई थी। आरोपी ने इसके लिए टेप भी खरीदी हुई थी। इसके लिए उसने अपने कई दोस्तों से संपर्क किया लेकिन जब कोई भी तैयार नहीं हुआ तो पहले से कई चोरियों में शामिल रहे जयसिंहपुर निवासी प्रदीप और गुलशन से बात की। दोनों को बताया कि उनके दादा कबाड़ी का काम करते हैं। दादा के पास काफी मात्रा में तांबा रखा हुआ है। वो तीनों मिलकर वारदात को अंजाम देंगे और तांबा बेचकर आपस में बराबर रुपये बांट लेंगे। तय योजना के तहत दोनों आ गए और आरोपी ने आने के बाद प्रदीप और गुलशन को हत्या की योजना के बारे में बताया। इसके बाद तीनों ने मिलकर वारदात को अंजाम दे दिया।
हत्या के बाद बोला आरोपी, दादा को कहा था सीसीटीवी लगवा लो
सोमवार सुबह परिवार के साथ आरोपी रविंद्र भी रोने का नाटक करता रहा। आरोपी ने मीडिया के समक्ष बोला कि उसने कई बार दादा को कहा था कि आपके यहां काफी सामान पड़ा रहता है इसलिए सीसीटीवी लगवा लो लेकिन दादा ने उसकी बात नहीं मानी। आरोपी ने कहा था कि अगर कैमरे लगे होते तो पता लग जाता दादा-दादी को किसने मारा है। आरोपी बार-बार कहता रहा कि लूट के बाद ही हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया है।